मिर्जापुर। मिर्जापुर में फिटनेस सेंटर की आड़ में चल रहे एक संगठित अपराध नेटवर्क का खुलासा होने से हड़कंप मच गया है। जिम के नाम पर युवतियों को फंसाने, अश्लील सामग्री के जरिए ब्लैकमेल करने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने वाले गिरोह पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दो पीड़िताओं की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच अब एक बड़े रैकेट तक जा पहुंची है, जिसके तार कई जिम, ट्रेनरों और यहां तक कि एक पुलिसकर्मी से भी जुड़े मिले हैं।
एनकाउंटर में पकड़ा गया मास्टरमाइंड
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य आरोपी जिम संचालक फरीद अहमद है, जिसे मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान उसके पैर में गोली लगी। उसी शाम गिरोह से जुड़े भदोही में तैनात जीआरपी के हेड कॉन्स्टेबल को भी हिरासत में ले लिया गया, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

पांच जिम सील, कई आरोपी जेल में
अब तक पुलिस इस मामले में जिम ट्रेनर मोहम्मद शेख अली आलम समेत तीन जिम मालिकों और अन्य आरोपियों को जेल भेज चुकी है। कार्रवाई के तहत शहर के पांच जिम—KGN-1.0, KGN-2.0, KGN-3.0, बी-फिट और आयरन फायर—को सील कर दिया गया है। आरोपियों के मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों से 50 से अधिक युवतियों से जुड़ी आपत्तिजनक वीडियो, फोटो और चैट बरामद होने का दावा किया गया है।
दोस्ती से ब्लैकमेलिंग तक का जाल
पुलिस जांच में सामने आया है कि जिम में आने वाली हिंदू युवतियों को पहले ट्रेनिंग के बहाने नजदीकियां बढ़ाकर भरोसे में लिया जाता था। इसके बाद उनकी तस्वीरों और वीडियो को AI तकनीक से एडिट कर आपत्तिजनक रूप दिया जाता और फिर इन्हीं के जरिए ब्लैकमेल किया जाता। पीड़िताओं पर न सिर्फ पैसे देने का दबाव बनाया जाता, बल्कि कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए भी मजबूर किया जाता था।
पीड़िता का आरोप: प्यार, धमकी और जबरन धर्मांतरण
बी-फिट जिम से जुड़ी एक युवती ने अपनी शिकायत में बताया कि ट्रेनर ने पहले प्रेम संबंध का नाटक किया, फिर उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो बनाकर धमकाने लगा। उससे पैसे ऐंठे गए, उसके नाम पर लोन तक करवा लिया गया और लगातार ओटीपी मांगे जाते रहे। युवती का आरोप है कि उस पर बुर्का पहनने, नमाज पढ़ने और कलमा पढ़वाकर धर्म बदलने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर जान से मारने और वीडियो वायरल करने की धमकी दी जाती थी।
जांच का दायरा बढ़ा, फंडिंग भी रडार पर
एएसपी सिटी नितेश सिंह के अनुसार, जिन पांच जिमों की जांच चल रही है, उनमें से चार एक ही परिवार से जुड़े लोगों द्वारा संचालित थे। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क के पीछे बड़ी फंडिंग है। कम वेतन के बावजूद आरोपियों का महंगे कपड़े, ब्रांडेड जूते और हाई-एंड मोबाइल इस्तेमाल करना संदेह के घेरे में है। जिम में निवेश करने वालों में कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है।
कॉल डिटेल और नेटवर्क की परतें
पुलिस ने आरोपियों के पिछले दो साल के कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं, ताकि यह पता चल सके कि नेटवर्क किन-किन लोगों से जुड़ा हुआ था। एसपी सोमेन वर्मा ने बताया कि अब तक इस गिरोह से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
मिर्जापुर का यह मामला अब सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि तकनीक, धर्म और भरोसे के दुरुपयोग की एक गंभीर तस्वीर बनकर सामने आया है—जिस पर पुलिस की नजर और सख्त होती जा रही है।






