समाज से चंदा जुटाकर लाखों रुपये डकार गये नरेश विश्वकर्माः जगदीश पांचाल

विश्वकर्मा समाज में तकरार गहराईः चंदा गबन, फर्जी चिकित्सक होने और दबाव बनाने के गंभीर आरोपों को लेकर जगदीश पांचाल ने की डीएम-एसएसपी से शिकायत

मुजफ्फरनगर। विश्वकर्मा समाज में एक सामाजिक संगठन पर वर्चस्व को लेकर पिछले कुछ समय से चल रहा विवाद अब और भी अधिक तीखा रूप ले चुका है। समाज के सक्रिय पदाधिकारी नरेश विश्वकर्मा द्वारा जिला प्रशासन से शिकायत के बाद अब दूसरा पक्ष भी सामने आ गया है। नरेश विश्वकर्मा पर समाज से किये गये चंदे के लाखों रुपये का गबन करने के आरोप लगने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। भाजपा नेता जगदीश पांचाल ने डीएम और एसएसपी को औपचारिक शिकायत देकर नरेश विश्वकर्मा तथा उनके सहयोगियों के खिलाफ विस्तृत जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नरेश विश्वकर्मा स्वयं को डॉक्टर बताकर समाज के लोगों को लंबे समय से गुमराह कर रहे हैं। साथ ही समाज के कार्यक्रमों व योजनाओं के नाम पर जमा किए गए चंदे का अब तक कोई संतोषजनक हिसाब-किताब प्रस्तुत नहीं किया गया है।
गुरूवार को शहर के एक रेस्टोरेंट में विश्वकर्मा चौक समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष जगदीश पांचाल और महासचिव मुकेश धीमान के द्वारा अन्य पदाधिकारियों और समाज के जिम्मेदार लोगों के साथ पत्रकारों से वार्ता की गई। इसमें जगदीश पांचाल और मुकेश धीमान ने बताया कि नरेश विश्वकर्मा ने समाज के कुछ लोगों के साथ विगत दिवस जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर ट्रस्ट के गठन और पदाधिकारियों पर भ्रामक एवं साक्ष्यहीन आरोप लगाये हैं। जबकि वास्तविकता कुछ ओर है। विश्वकर्मा चौक ट्रस्ट समिति विश्वकर्मा चौक भोपा रोड भारतीय ट्रस्ट अधिनियम 1882 के अन्तर्गत 02 जुलाई 2024 को उप रजिस्ट्रार प्रथम मुजफ्फरनगर के समक्ष विधिवित रूप से पंजीकृत संस्था है।
मुकेश धीमान ने बताया कि इससे पूर्व करीब 10-12 साल से एक अपंजीकृत संस्था विश्वकर्मा चौक समिति विद्यमान थी, जिसके अध्यक्ष नरेश विश्वकर्मा, जोकि खुद को डॉक्टर लिखते, बताते और प्रचारित करते हैं, रहे हैं और जगदीश पांचाल महामंत्री थे। 26 मई 2024 इस समिति के सभी सदस्यों के द्वारा समाज की एक आम सभा का आयोजन कराया गया था। इसमें सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था कि अपंजीकृत समिति को विश्वकर्मा चौक समिति ट्रस्ट के नाम पंजीकृत कराया जाये। इसमें नरेश ने ही जगदीश पांचाल को ट्रस्ट का अध्यक्ष चुनने का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी ने स्वीकार किया था। इसके बाद ट्रस्ट का पंजीकरण कराया गया।
पंजीकरण होने पर समिति स्वतः ही भंग हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद भी नरेश विश्वकर्मा ने खुद को स्वयंभू अध्यक्ष प्रचारित करते हुए समिति को अवैध रूप से खड़ा रखा और करीब 7-8 साल तक एकत्र किये गये सामाजिक चंदे का कोई हिसाब किताब नहीं दिया गया। साल में समिति को एक से दो लाख रुपये का चंदा मिलता रहा। इसमें से कुछ शोभायात्रा व अन्य आयोजन पर खर्च किया गया। इसके बावजूद जब भी हिसाब मांगा गया तो आनाकानी की गई। मुकेश धीमान का आरोप है कि जब समाज के सदस्यों ने चंदे की राशि का विवरण सख्ती के साथ मांगा तो नरेश विश्वकर्मा ने उलटा उन पर दबाव बनाने के लिए झूठी शिकायतें दर्ज कराना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि नरेश आठवीं पास है, लेकिन खुद को डॉक्टर बताते है। आज हमने डीएम और एसएसपी से मिलकर प्रार्थना पत्र दिया है और पुलिस व प्रशासन से नरेश विश्वकर्मा के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। आरोप है कि नरेश ने सामाजिक चंदे से एकत्र करीब 10-12 लाख रुपये का गबन किया हुआ है। उनके साथ मुकेश धीमान गालिबपुर आज भी फर्जी रसीद छपवाकर समाज के लोगों से चंदा जुटा रहे हैं। प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से बाबूराम पंाचाल, शेरपाल पांचाल, प्रदीप धीमान, अशोक धीमान आदि मौजूद रहे।

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