मुजफ्फरनगर जनपद को ‘लक्ष्मीनगर’ नाम देने की उठी मांग, नामित सभासदों ने नगर पालिका अध्यक्षा को सौंपा प्रस्ताव
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर का नाम बदलकर ‘लक्ष्मीनगर’ किए जाने की मांग अब औपचारिक रूप से नगर पालिका परिषद तक पहुंच गई है। नगर पालिका के नामित सभासदों ने इस संबंध में एक प्रस्ताव सौंपते हुए नगर की सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान को नई दिशा देने की बात कही है। प्रस्ताव को आगामी बोर्ड बैठक में रखने और शासन को अग्रसारित करने की मांग की गई है।
नगर पालिका परिषद में भाजपा कोर्ट से नामित पांचों सभासदों ने बुधवार को पटेलनगर स्थित आवास पर पहुंचकर नगरपालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप और उनके पति वरिष्ठ भाजपा नेता गौरव स्वरूप से मुलाकात की। इस दौरान शहर का नाम बदलकर ‘लक्ष्मीनगर’ किए जाने की मांग को लेकर सभी नामित सभासदों ने नगर पालिका अध्यक्षा मीनाक्षी स्वरूप को एक प्रस्ताव सौंपा, जिसमें नगर के नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू कराने का अनुरोध किया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि नगर का वर्तमान स्वरूप, उसकी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक महत्व और सामाजिक पहचान ऐसे नाम की अपेक्षा करती है जो भारतीय परंपराओं और मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता हो। सभासदों का मानना है कि ‘लक्ष्मीनगर’ नाम समृद्धि, संस्कृति और भारतीय सभ्यता के गौरव का प्रतीक है तथा यह नगर की पहचान को और अधिक सशक्त बनाएगा।
नामित सभासदों ने नगर पालिका अध्यक्ष से अनुरोध किया कि इस प्रस्ताव को आगामी बोर्ड बैठक के एजेंडे में शामिल किया जाए। परिषद से अनुमोदन मिलने के बाद इसे शासन के समक्ष भेजा जाए, ताकि नाम परिवर्तन की आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया प्रारंभ हो सके। सभासदों ने कहा कि नगर के अनेक नागरिक भी लंबे समय से ऐसी भावना व्यक्त करते रहे हैं कि शहर का नाम उसकी सांस्कृतिक विशेषताओं और ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप होना चाहिए। उनका कहना है कि ‘लक्ष्मीनगर’ नाम स्थानीय जनभावनाओं का सम्मान करने के साथ-साथ नगर को नई पहचान देने का कार्य करेगा।
प्रस्ताव सौंपने के दौरान पांचों नामित सभासद सचिन सैनी, अमन तोमर, अभिजीत सिंह गंभीर, रवि पाराशर और अमित गोयल बॉबी उपस्थित रहे। यहां मौजूद अन्य लोगों ने इस पहल को नगर के सांस्कृतिक गौरव से जुड़ा विषय बताते हुए समर्थन व्यक्त किया। नगर पालिका अध्यक्षा मीनाक्षी स्वरूप और वरिष्ठ भाजपा नेता गौरव स्वरूप ने प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद कहा कि जनभावनाओं एवं नगर के सांस्कृतिक महत्व से जुड़े इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि नियमानुसार प्रस्ताव को बोर्ड बैठक में प्रस्तुत करने तथा आवश्यक प्रक्रिया के अनुरूप शासन तक पहुंचाने के लिए सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।






