बारिश से गेहूं की फसल नुकसान, ओलावृष्टि और बारिश से बढ़ा संकट

पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में बेमौसम बारिश ने खेती-किसानी पर बड़ा असर डाला है। बारिश से गेहूं की फसल नुकसान की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जबकि कई इलाकों में कटाई के समय खेतों में पड़ी फसल भी भीग गई है। हरियाणा और पंजाब में किसान मुआवजे की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। मंगलवार को हुई ताजा बारिश ने दिल्ली और आसपास के इलाकों के साथ पश्चिम यूपी और हरियाणा के कई जिलों में भी हालात और खराब कर दिए।

देश के कई राज्यों में 14 मार्च के बाद से मौसम लगातार बदला हुआ है। बीते दो सप्ताह में कई दौर की बारिश हो चुकी है। शहरों में इस मौसम ने भले राहत दी हो, लेकिन किसानों के लिए यह भारी मुसीबत बन गया है। यह बारिश ऐसे समय पर हुई, जब ज्यादातर इलाकों में गेहूं की कटाई चल रही है या फिर फसल कटकर खेतों और खुले स्थानों पर पड़ी है। ऐसे में लगातार बारिश और कई जगह ओलावृष्टि ने नुकसान को और बढ़ा दिया।

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मंगलवार को हरियाणा के हिसार में 7.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा चरखी दादरी, रोहतक, पलवल, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम और सोनीपत समेत कई जिलों में जमकर बारिश हुई। कई जगहों पर ओलावृष्टि की भी खबर है, जिससे गेहूं की तैयार फसल को अतिरिक्त नुकसान पहुंचा। पंजाब में भी फिरोजपुर, मुक्तसर और फाजिल्का में बारिश दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में खराब मौसम के बाद फसल नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है, ताकि प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जा सके। पश्चिम यूपी के कई जिलों में भारी बारिश ने खेतों में खड़ी और कटी दोनों तरह की फसलों को प्रभावित किया है।

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दिल्ली और उससे सटे इलाकों में मंगलवार की बारिश का असर भी खेती पर पड़ा है। इससे किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि कई जगह गेहूं पहले ही कट चुका था। गेहूं की अच्छी फसल के लिए माना जाता है कि कटाई के लायक होने से पहले तापमान बढ़ना फायदेमंद होता है। लेकिन मौजूदा हालात में बारिश और कम तापमान ने फसल की गुणवत्ता और उत्पादन, दोनों पर असर डाला है।

यही वजह है कि किसान इस मौसम को राहत नहीं, बल्कि नुकसान की वजह मान रहे हैं। हरियाणा और पंजाब के किसानों की चिंता इस बात से भी बढ़ी है कि 3 और 4 अप्रैल को बारिश का एक और दौर आ सकता है। यह संकट सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र में भी बारिश ने बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचाया है। अब तक आई रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य में 64 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। इस नुकसान में गेहूं और फल की फसलें शामिल हैं।

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इसके अलावा महाराष्ट्र में गेहूं, ज्वार और प्याज जैसी जरूरी फसलें भी बुरी तरह प्रभावित बताई जा रही हैं। लगातार बारिश और खराब मौसम के बाद सबसे बड़ा सवाल अब राहत और मुआवजे का है। हरियाणा और पंजाब में किसान खुलकर मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में भी प्रभावित किसानों को प्रशासनिक मदद का इंतजार है। फिलहाल बेमौसम बारिश ने साफ कर दिया है कि इस बार मौसम का एक झटका किसानों की पूरी मेहनत पर भारी पड़ सकता है। बारिश से गेहूं की फसल नुकसान अब कई राज्यों में एक बड़ी कृषि चिंता बन चुका है।

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