ब्राह्मण-क्षत्रिय नहीं, बस यह शर्त… RSS प्रमुख पर मोहन भागवत का बड़ा बयान

मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संघ नेतृत्व को लेकर चल रही जातिगत चर्चाओं पर साफ शब्दों में स्थिति स्पष्ट की है। मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि संघ का सर्वोच्च पद किसी भी जाति से बंधा नहीं है।

भागवत ने मंच से स्पष्ट किया कि सरसंघचालक बनने के लिए न तो ब्राह्मण, क्षत्रिय या किसी विशेष वर्ग से होना जरूरी है और न ही जाति के आधार पर कोई चयन होता है। उन्होंने कहा कि संघ में नेतृत्व का आधार केवल एक है—वह व्यक्ति हिंदू हो और संघ की विचारधारा को जीवन में उतारने वाला हो।

इसे भी पढ़ें:  दिल्ली एयरपोर्ट पर 2.89 करोड़ का सोना जब्त, म्यांमार के तीन नागरिक गिरफ्तार

कार्यक्रम के दौरान मौजूद स्वयंसेवकों और गणमान्य अतिथियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस में पद प्रतिष्ठा नहीं बल्कि सेवा का माध्यम होते हैं और यहां जिम्मेदारी सौंपते समय जाति नहीं, व्यक्ति का आचरण और समर्पण देखा जाता है।

इस अवसर पर सरसंघचालक ने भाषा के विषय पर भी खुलकर विचार रखे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा से उन्हें कोई विरोध नहीं है, लेकिन जहां मातृभाषा या हिंदी से काम चल सकता है, वहां विदेशी भाषा को प्राथमिकता देना उचित नहीं है।

इसे भी पढ़ें:  शिखर धवन को ईडी ने किया तलब.... गैरकानूनी बेटिंग एप मामले में पूछताछ 

भागवत ने कहा कि वैश्विक जरूरतों के कारण अंग्रेजी का प्रयोग जरूरी हो सकता है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव बनाए रखने के लिए स्थानीय भाषाओं को सम्मान देना समाज की जिम्मेदारी है।

Also Read This

सिंधु जल संधि के बाद भारत का बड़ा दांव, चिनाब नदी पर 1856 MW का मेगा हाइड्रो प्रोजेक्ट

नई दिल्ली/जम्मू। भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर बने हालात के बीच केंद्र सरकार ने चिनाब नदी पर ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। सरकारी पनबिजली कंपनी NHPC ने जम्मू-कश्मीर के रामबन क्षेत्र में प्रस्तावित सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के निर्माण के लिए औपचारिक टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी की ओर से जारी दस्तावेजों के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 5129 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पूरा निर्माण कार्य एक ही पैकेज के तहत किया जाएगा, जिसमें नदी के पानी को मोड़ने के लिए टनल, कोफर डैम, स्पाइरल टनल, एक्सेस टनल के साथ-साथ संबंधित सड़कों और अन्य सहायक

Read More »