शालू सैनी की स्नेहिल पहलः बेसहारा माताओं को मिला अपना घर

नगर पालिकाध्यक्ष ने किया बेसहारा बुजुर्ग महिलाओं के लिए साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा स्थापित ‘अपना घर वृद्धा आश्रम’ का उद्घाटन

मुजफ्फरनगर। समाज में जहां अक्सर बुजुर्ग महिलाएं जीवन के अंतिम पड़ाव पर अपनों की उपेक्षा और तिरस्कार का दंश झेलती हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो संवेदनशीलता और सेवा भाव से उनके लिए सहारा बनकर सामने आते हैं। मुजफ्फरनगर में ऐसी ही एक प्रेरक पहल की शुरुआत क्रांतिकारी शालू सैनी द्वारा की गई है, जिन्होंने बेसहारा बुजुर्ग महिलाओं के लिए ‘अपना घर वृद्धा आश्रम की नींव रखी। साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रांतिकारी शालू सैनी ने समाज के सबसे उपेक्षित वर्गकृबेसहारा बुजुर्ग महिलाओंकृके लिए दक्षिणी कृष्णापुरी में गोगा की म्हाड़ी के सामने ‘अपना घर वृद्धा आश्रम’ की शुरुआत कर मानवता की मिसाल पेश की है। यह आश्रम उन महिलाओं के लिए समर्पित है, जिन्हें जीवन की संध्या में अपनों का साथ नहीं मिल सका और जो सामाजिक तिरस्कार का सामना करने को विवश रहीं।

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रविवार को आयोजित भव्य उद्घाटन समारोह में नगरपालिका परिषद की अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने फीता काटकर आश्रम का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने क्रांतिकारी शालू सैनी और उनकी पूरी टीम की खुले दिल से सराहना करते हुए कहा कि, आज के समय में जब रिश्ते कमजोर हो रहे हैं, ऐसे में यह आश्रम केवल एक भवन नहीं बल्कि संवेदनाओं का केंद्र बनेगा। शालू सैनी जैसी समाजसेविकाएं हमारे समाज की असली धरोहर हैं, जो बेसहारा माताओं को सम्मान और अपनापन देने का कार्य कर रही हैं। कहा कि यह आश्रम बेसहारा बुजुर्ग महिलाओं के संरक्षण के लिए समाज को संवेदनशीलता, करुणा और जिम्मेदारी का भी संदेश देगा। नगर पालिका स्तर पर भी ऐसे सेवा कार्यों को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा, ताकि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों तक सहायता पहुंच सके।

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अपने संबोधन में शालू सैनी ने भावुक शब्दों में कहा कि समाज सेवा के दौरान उन्हें कई ऐसी माताओं से मिलने का अवसर मिला, जिनकी आंखों में अपनों के बिछड़ने का दर्द और भविष्य की अनिश्चितता साफ झलकती थी। उन्हीं भीगी पलकों ने उन्हें प्रेरित किया कि मुजफ्फरनगर में एक ऐसी चौखट बनाई जाए, जहां कोई भी मां खुद को बेसहारा न समझे। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से शुरू किया गया यह आश्रम केवल ईंट-पत्थरों की इमारत नहीं है, बल्कि उन बुजुर्ग महिलाओं का घर है, जिन्होंने अपनों की बेरुखी झेली है। यहां उन्हें केवल रोटी और छत ही नहीं, बल्कि बेटी का प्यार और सम्मान भी मिलेगा।

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क्रांतिकारी शालू सैनी पहले से ही ‘लावारिसों की वारिस’ के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। अब तक वह अपनी टीम के साथ सामाजिक सहयोग से एक हजार से अधिक लावारिस शवों का उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर चुकी हैं। इस अद्वितीय सेवा के लिए उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं और वे वर्ल्ड रिकॉर्ड भी कायम कर चुकी हैं। आश्रम के उद्घाटन अवसर पर मुख्य रूप से मास्टर विजय सिंह, मंगलेश प्रजापति, राजू सैनी, साक्षी सैनी, सुमित सैनी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए सहयोग का भरोसा दिलाया।

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