ओली का इस्तीफा और पड़ोसी देशों में राजनीतिक अस्थिरता: नेपाल से लेकर अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान तक सत्ता संकट

पिछले पाँच वर्षों से भारत के पड़ोसी देशों में लगातार सत्ता परिवर्तन और विरोध आंदोलन

भारत के पड़ोसी देश बीते कुछ वर्षों से गहरे राजनीतिक संकट और अस्थिरता से गुजर रहे हैं। कहीं आर्थिक गिरावट, कहीं भ्रष्टाचार, तो कहीं अभिव्यक्ति की आज़ादी पर अंकुश—इन कारणों ने सरकारों को बार-बार गिराया और सत्ता परिवर्तन की नौबत ला दी।

नेपाल: सोशल मीडिया बैन से भड़का Gen-Z विरोध

नेपाल में हाल ही में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों ने ज़बरदस्त रफ्तार पकड़ी। युवाओं के “Gen-Z Protest” ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। प्रदर्शनकारी संसद, सुप्रीम कोर्ट और यहाँ तक कि राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के निजी आवास तक पहुँच गए। अब तक गृह, कृषि और स्वास्थ्य मंत्री समेत पाँच मंत्री और 20 से अधिक विपक्षी सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। विपक्ष संसद भंग कर नए चुनाव की मांग कर रहा है।

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अफगानिस्तान: तालिबान की वापसी से बदला सत्ता समीकरण

अगस्त 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए। काबुल एयरपोर्ट पर मची भगदड़ में 170 से ज्यादा लोगों की जान गई। सत्ता परिवर्तन के बाद महिलाओं की स्वतंत्रता पर पाबंदियां बढ़ीं और अफगानिस्तान गहरे आर्थिक संकट में फँस गया।

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श्रीलंका: आर्थिक आपदा और राष्ट्रपति का पलायन

2022 में श्रीलंका भीषण आर्थिक संकट में डूब गया। खाद्य, ईंधन और दवाइयों की किल्लत से जनता सड़कों पर उतर आई। हालात इतने बिगड़े कि राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने संसद और राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया, यहाँ तक कि राष्ट्रपति के स्विमिंग पूल तक प्रदर्शनकारियों ने नियंत्रण कर लिया।

बांग्लादेश: छात्र आंदोलन ने बदली सरकार

2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया। इसे “दूसरा स्वतंत्रता संग्राम” कहा गया। हिंसा में 300 से अधिक लोग मारे गए और प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी। सेना की मदद से तख्तापलट हुआ और सरकार गिर गई।

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पाकिस्तान: लगातार अस्थिरता और आतंकी खतरे

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अविश्वास प्रस्ताव के ज़रिए हटाए जाने के बाद राजनीतिक अस्थिरता लगातार बनी हुई है। इमरान समर्थक रैलियों और विरोध प्रदर्शनों में जुटे हैं। वहीं, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसी आतंकी गतिविधियों ने स्थिति को और अस्थिर बना दिया है।

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