सनातन धर्म सभा भवन में अग्रवाल परिवार की श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन शुक-परीक्षित चरित्र, मनुकर्दम प्रसंग, वाराह अवतार और कपिल उपदेश का भावपूर्ण वर्णन
मुजफ्फरनगर। अग्रवाल परिवार के द्वारा सनातन धर्म सभा भवन में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को कथा वाचक हिमेश शास्त्री महाराज ने विभिन्न पौराणिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, धर्म और मानव जीवन के मूल्यों का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि मनुष्य को सदैव सत्कर्मों के मार्ग पर चलना चाहिए और भगवान की भक्ति से ही जीवन का कल्याण संभव है। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और पूरे वातावरण में भक्ति का माहौल बना रहा।

कथा वाचक हिमेश शास्त्री महाराज ने श्रद्धालुओं के समक्ष शुक-परीक्षित चरित्र, मनुकर्दम चरित्र, वाराह अवतार और कपिल उपदेश प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। कथा वाचन करते हुए हिमेश शास्त्री महाराज ने शुक-परीक्षित चरित्र के माध्यम से बताया कि राजा परीक्षित को जब सात दिन के भीतर मृत्यु का श्राप मिला, तब उन्होंने जीवन के अंतिम समय को भगवान की भक्ति और ज्ञान प्राप्ति में लगाया। उन्होंने शुकदेव मुनि से श्रीमद भागवत कथा का श्रवण किया और उसी के माध्यम से मोक्ष का मार्ग प्राप्त किया। इस प्रसंग के माध्यम से महाराज ने बताया कि मनुष्य को हर परिस्थिति में भगवान की शरण में रहकर जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।

मनु-कर्दम चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति, भगवान की लीला और धर्म के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मनु और कर्दम ऋषि के प्रसंग से हमें संयम, तपस्या और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश मिलता है। वाराह अवतार के प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा वाचक ने बताया कि जब हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को पाताल लोक में ले जाकर छिपा दिया था, तब भगवान विष्णु ने वाराह अवतार धारण कर पृथ्वी को बचाया और दैत्य का वध कर धर्म की स्थापना की। कथा के दौरान वाचक हिमेश शास्त्री महाराज ने कपिल उपदेश प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन कर भगवान कपिल द्वारा माता देवहूति को दिए गए ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के संदेश को समझाया। उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति और आत्मज्ञान के माध्यम से ही मनुष्य जीवन के बंधनों से मुक्त हो सकता है। जीवन में सुख और दुख का वर्णन करते हुए कहा कि मानव जीवन में अनुकूलता और प्रतिकूलता को सुख-दुख मानने लगा, जबकि कर्मों का प्रतिफल ही सुख व दुख है, दुख का क्षण ही हमें भगवान की भक्ति से जोड़ता है। यह तय है कि कर्मों का फल भोगना ही पड़ेगा और ये ही श्रीमद भागवत का ज्ञान है।

कथा स्थल पर पूरे समय भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ कथा का श्रवण किया और भगवान के नाम के जयकारों से पूरा परिसर गूंजता रहा। शुक्रवार को मुख्य अतिथि के रूप में शाकुम्भरी पेपर मिल के अविन अग्रवाल, डॉ. प्रवेश,डॉ. संयम और सुनील गर्ग एडवोकेट रहे। कथा आयोजक अग्रवाल परिवार के अभिनव अग्रवाल सहित सभी पारिवारिक सदस्यों ने अतिथियों और श्रद्धालुओं का स्वागत-सत्कार किया और कथा के समापन पर प्रसाद वितरण भी किया गया। मुख्य रूप से परमात्मा शरण अग्रवाल, प्रदीप गर्ग, किशन अग्रवाल, पीयूष अग्रवाल, अभिनव अग्रवाल, दीप अग्रवाल, अभिनव गर्ग, कार्तिक अग्रवाल, दीपक गोयल, योगेश माहेश्वरी, अमित गर्ग, श्रुति अग्रवाल, निकिता अग्रवाल, आंचल अग्रवाल, इनाक्षी अग्रवाल, पूजा अग्रवाल, प्रीति तायल और रचना अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।






