UP Panchayat Election 2026: मुजफ्फरनगर के ग्राम प्रधानों ने मंत्रियों को घेरा, कार्यकाल बढ़ाने या चुनाव कराने की मांग

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 (UP Panchayat Election 2026) की तारीखों को लेकर बढ़ रहे असमंजस के बीच मुजफ्फरनगर के ग्राम प्रधानों ने मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन के प्रतिनिधियों ने राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल और कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रधानों की मांग है कि या तो चुनाव समय पर हों या कार्यकाल बढ़ाया जाए।

  • 25 मई 2026 को खत्म हो रहा है ग्राम प्रधानों का कार्यकाल।
  • मंत्री कपिल देव अग्रवाल और अनिल कुमार को सौंपा गया ज्ञापन।
  • चुनाव की घोषणा या कार्यकाल बढ़ाने की मांग।

उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर अभी तक स्थिति साफ नहीं हो पाई है। मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 मई 2026 को समाप्त होने वाला है, लेकिन चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा न होने से ग्राम प्रधानों में बेचैनी बढ़ गई है।

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ग्राम प्रधानों का कहना है कि गांवों में विकास कार्य लगातार चल रहे हैं। ऐसे में यदि चुनाव प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हुई, तो पंचायत स्तर पर प्रशासनिक और वित्तीय काम प्रभावित हो सकते हैं। प्रधानों ने सरकार से मांग की है कि या तो तय समय पर पंचायत चुनाव कराए जाएं या फिर मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने पर फैसला लिया जाए।

गांधीनगर में राज्य मंत्री के आवास पर पहुंचे प्रधान

इसी मांग को लेकर शनिवार को अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन से जुड़े ग्राम प्रधान मुजफ्फरनगर के गांधीनगर क्षेत्र में राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल के आवास पर पहुंचे। यहां प्रधानों ने मंत्री को ज्ञापन सौंपा और पंचायत चुनाव से जुड़ी अपनी चिंता रखी।

प्रधानों ने कहा कि चुनाव की तारीखों को लेकर लगातार असमंजस बना हुआ है। इससे गांवों में यह चर्चा तेज हो गई है कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे या आगे टल सकते हैं। उनका कहना था कि देरी की स्थिति में गांवों के विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ सकता है।

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“गांवों के काम रुकने नहीं चाहिए”

ग्राम प्रधानों ने ज्ञापन में कहा कि पंचायत व्यवस्था ग्रामीण विकास की सबसे निचली और अहम कड़ी है। गांवों में सड़क, नाली, सफाई, पेयजल, पंचायत भवन, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी काम ग्राम पंचायतों के माध्यम से ही चलते हैं।

प्रधानों के अनुसार, अगर कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनावी प्रक्रिया लंबी खिंचती है, तो कई पंचायतों में निर्णय लेने और धनराशि खर्च करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से वे सरकार से स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं।

कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार से भी मिले प्रतिनिधि

राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल को ज्ञापन देने के बाद ग्राम प्रधानों का प्रतिनिधिमंडल कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार के आवास पर भी पहुंचा। यहां भी प्रधानों ने अपनी मांगों को रखा और सरकार तक बात पहुंचाने का आग्रह किया।

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प्रधानों ने कहा कि कोरोना काल में भी उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया था। उस समय कई ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक और वित्तीय दिक्कतें सामने आई थीं। उन्होंने कहा कि इस बार ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बननी चाहिए।

कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने ग्राम प्रधानों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को सरकार के सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह विषय पंचायत व्यवस्था और ग्रामीण विकास से जुड़ा है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाएगा।

प्रधानों ने मांग की कि इस मामले में जल्द निर्णय लिया जाए, ताकि गांवों में भ्रम की स्थिति खत्म हो और विकास कार्यों की रफ्तार बनी रहे।

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