श्रीलंका में मंत्रियों ने राकेश टिकैत संग निकाला पैदल मार्च

अंतरराष्ट्रीय किसान सम्मेलन में भारत की गूंज, श्रीलंका के कैंडी शहर में किसानों की एकजुटता पर हुई गहन चर्चा

मुजफ्फरनगर। किसानों की समस्याएं किसी एक देश तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक समान चुनौती बन चुकी हैं। श्रीलंका के कैंडी शहर में चल रहे दस दिवसीय अंतरराष्ट्रीय किसान सम्मेलन में यह साफ दिखाई दिया। इस वैश्विक सम्मेलन में 140 देशों के किसान शामिल हुए हैं और छोटे किसानों की दुर्दशा, बढ़ते पूंजीवाद के खतरे, खाद्य सुरक्षा और कृषि संकट जैसे अहम मुद्दों पर बिंदुवार चर्चा की गई।

नयेलेनी द्वारा श्रीलंका में तीसरा ग्लोबल फोरम 2025 आयोजित किया जा रहा है, इस दस दिवसीय सम्मेलन में विश्व से अनेक किसान संगठनों को बुलाया गया है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत भी यूनियन के प्रतिनिधिमंडल के साथ इसमें शामिल हैं। विगत दिवस श्रीलंका सरकार की ओर से व्यापार, वाणिज्य, खाद्य सुरक्षा और सहकारी विकास मंत्री वसंथा समरसिंघे तथा वृक्षारोपण व सामुदायिक अवसंरचना मंत्री के. वी. सामंथा विद्यारत्ना ने विशेष रूप से शिरकत की। मंत्रियों ने भाकियू नेता राकेश टिकैत के साथ दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

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मंच से किसान नेता राकेश टिकैत द्वारा यह संदेश दिया गया कि चाहे भारत हो, एशिया हो या दुनिया का कोई भी कोना हो, किसान की समस्याएं लगभग समान हैं, और समाधान भी तभी संभव है जब किसान एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। सम्मेलन में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि कृषि, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण ढांचे से जुड़ी चुनौतियां सिर्फ किसी एक क्षेत्र या देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की साझी चिंता है। पूंजीवाद का बढ़ता दबाव छोटे किसानों को कमजोर कर रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर उत्पादन, बाजार और रोजगार की स्थिति पर असर पड़ रहा है। सम्मेलन के दौरान भारतीय किसान यूनियन ने भारत का झंडा सम्मानपूर्वक फहराया, जिससे देश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन हुआ। विशेष क्षण तब बना जब श्रीलंका के अधिकारियों ने चौधरी राकेश टिकैत का हाथ थामकर उन्हें अपने साथ पैदल मार्च में शामिल किया। इस प्रतिनिधिमंडल में भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव चौ. यु(वीर सिंह, चेयरमैन जहीर फारूकी सहित दूसरे लोग भी शामिल हैं। जहीर फारूकी ने बताया कि श्रीलंका में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय किसान सम्मेलन किसानों की एकता और साझा समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। भारत सहित दुनिया के तमाम देशों के किसान मिलकर यदि रणनीति बनाएं, तो आने वाले समय में कृषि क्षेत्र के संकट को एक नई दिशा दी जा सकती है।

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