UP पंचायत चुनाव 2026: कब होंगे वोट, बैलेट पेपर या EVM? राजभर ने सब साफ किया

लखनऊ/वाराणसी। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही तमाम अटकलों के बीच पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा बयान देकर तस्वीर लगभग साफ कर दी है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश सरकार पंचायत चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है और ये चुनाव तय समय पर ही होंगे।

मंगलवार को वाराणसी दौरे पर पहुंचे ओमप्रकाश राजभर ने साफ शब्दों में कहा कि पंचायत चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव के साथ कराने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले कराए जाएंगे और इसकी तैयारियां ज़मीनी स्तर पर शुरू हो चुकी हैं।

राजभर के मुताबिक, पंचायत चुनाव के लिए मतपत्र (बैलेट पेपर) छप चुके हैं और सभी जिलों तक पहुंचाए जा चुके हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी अपने-अपने स्तर पर तैयारियों में जुट गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव ईवीएम से नहीं, बल्कि परंपरागत मतपत्रों के जरिए ही कराए जाएंगे।

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28 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन

पंचायती राज मंत्री ने बताया कि पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 28 फरवरी 2026 को किया जाएगा। उन्होंने भावी प्रत्याशियों को सलाह दी कि अंतिम सूची जारी होने से पहले वे अपने समर्थकों के नाम मतदाता सूची में जरूर जुड़वा लें, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।

अप्रैल से जुलाई के बीच चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की संभावना

हालांकि मंत्री ने चुनाव की सटीक तारीखों की घोषणा नहीं की, लेकिन संकेत दिया कि अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्न करा ली जाएगी। पहले चरण में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव होंगे। इसके बाद ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के अप्रत्यक्ष चुनाव कराए जाएंगे।

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उन्होंने दावा किया कि सभी जिले चुनाव के लिए तैयार हैं और जल्द ही इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।

शंकराचार्य के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया

इस दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि देश संविधान से चलता है, किसी व्यक्ति विशेष के बयान से नहीं। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार ही सरकार चल रही है और किसी के कहने से न तो संविधान बदलेगा और न ही नया कानून बनेगा।

पार्टी के भीतर मंथन जारी

हालांकि, भाजपा और सरकार के भीतर पंचायत चुनाव को लेकर पूरी तरह एकमत नहीं दिख रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव कराना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है। इससे गांवों में कार्यकर्ताओं के बीच आपसी टकराव बढ़ सकता है और टिकट न मिलने से नाराज नेता दूसरी पार्टियों का रुख कर सकते हैं।

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सूत्रों के अनुसार, यदि जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहता है, तो उसका असर सीधे विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव के पहले चरण में भी पार्टी को नुकसान झेलना पड़ा था, जिसकी भरपाई में सरकार और संगठन को काफी मेहनत करनी पड़ी थी।

बताया जा रहा है कि हाल ही में हुई पार्टी और सरकार की कोर ग्रुप बैठक में भी इस मुद्दे पर गंभीर मंथन हुआ है कि पंचायत चुनाव को विधानसभा चुनाव के बाद कराया जाए या नहीं। फिलहाल मंत्री के बयान से साफ है कि सरकार समय पर पंचायत चुनाव कराने के मूड में दिख रही है।

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