मोदी के विरुद्ध बार-बार किसान आंदोलन चलवा रहे हैं अलगावादी नेताः अशोक बालियान

मुजफ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान ने किसान आंदोलन को लेकर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमने अपनी अमेरिका यात्रा में देखा है कि भारत में मोदी सरकार सिख अलगाववादियों जो कदम उठा रही है, उसका प्रभाव विदेशों में भी नजर आ रहा है। अमेरिका में सिख समुदाय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई कदमों के चलते अमेरिका में खालिस्तानी आंदोलन कमजोर हुआ है।

अमेरिका में हमें हरवंत सिंह ढिल्लों ने कहा कि आम सिख जनता है कि मोदी सरकार ने दुनिया के स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत किया है। अब केवल कनाडा व अमेरिका में मुट्ठी भर खालिस्तानी ही हैं, जिनकी वजह से पूरे सिख समुदाय की बदनामी हो रही है। आम सिख राष्ट्रवादी हैं और अखंड भारत के साथ खड़े हैं। दुनिया की कुछ ताकतें इस बात से परेशान है कि मोदी सरकार कैसे भारत में बदलाव लाई है और इसे प्रगति के पथ पर ले कर गई है।

प्रधानमन्त्री मोदी का मानना है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्र शिक्षाएं संपूर्ण विश्व को प्रकाशमान कर रही हैं। इनसे प्रेरणा लेकर सिखों ने वैश्विक स्तर पर कई क्षेत्रों में अग्रणी सेवा की है। प्रधानमंत्री मोदी के सिखों के साथ विशेष लगाव को समुदाय और पवित्र गुरुओं के प्रति उनके व्यक्तिगत श्र(ा भाव के साथ-साथ सिख समुदाय को सशक्त बनाने के लिए किए गए उनकी सरकार के कार्यों में देखा जा सकता है। बात चाहे श्री गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती की हो या श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की 350वीं जयंती जैसे पावन अवसरों के उत्सव के बारे में हो, चाहे वर्ष 1984 के कत्लेआम के पीड़ितों के बारे में हो या श्री करतारपुर साहिब गलियारे के निर्माण की, प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्तिगत रुचि दिखाते हुए सिख समुदाय के लिए काम करने का मार्ग प्रशस्त किया है। मोदी सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि 1984 के कत्लेआम पीड़ितों और प्रभावित परिवारों को न्याय मिले जो तीन दशकों से जहर का घूंट पी कर भी जी रहे थे। अकेले दिल्ली में ही 1320 परिवारों को 125.52 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया गया तथा भारत भर में कत्लेआम पीड़ितों के नजदीकी रिश्तेदारों को 5 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि प्रदान की गई। सिख समुदाय 70 सालों से यह अरदास करती रही कि जो गुरुद्वारे एवं धाम बंटवारे के बाद पाकिस्तान में रह गए, उनके खुले दर्शन, दीदार और सेवा-सम्भाल सिखों को मिले। प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के भारत विरोधी रवैये के बावजूद करतारपुर गुरुद्वारे के लिए कॉरिडोर बनवाया। मोदी सरकार से पहले वर्ष 2014 में सिर्फ 18 लाख सिख छात्रों को छात्रवृत्तियां दी जाती थीं लेकिन मोदी सरकार ने करीब 31 लाख सिख छात्रों को मैट्रिक पूर्वध्बाद और मैरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्तियां देना सुनिश्चित किया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन कानून के तहत अफगानिस्तान और पाकिस्तान के उन सिख शरणार्थियों को भारत की नागरिकता पाने में मदद की है, जिन्हें जबरन धर्म बदलना या आतंकवाद आदि का शिकार होना पड़ा था। अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने से सिख अल्पसंख्यकों को जम्मू-कश्मीर में समान अधिकार मिले। इसके साथ ही वर्ष 1947 में पश्चिमी पाकिस्तान से आए 1.16 लाख सिख शरणार्थियों को आवास प्रमाण पत्र तथा मतदान का अधिकार दिलाया। दुनिया में हर देश की अपनी संस्कृति होती है। भारत की संस्कृत सनातन है। इस्लामिक हमलावरों ने भारतीय संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया था। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सनातन धर्म मजबूत हो रहा है।

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यह बात सच है कि मोदी सरकार द्वारा भारत में व भारत से बाहर भी सिख अलगाववादियों पर कार्रवाई की गयी है। विदेशों में बैठे सिख अलगाववादियों के जनमत संग्रह अभियान को रोका गया है। मोदी सरकार का यह संदेश जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल गया था। फिर इन मुट्ठीभर सिख अलगाववादियों ने दिल्ली में चले किसान आंदोलन में सिखों को भड़काने का कार्य किया था।यह आन्दोलन 13 महीने चला था। पिछले वर्ष ब्रिटिश कोलंबिया में एक मंदिर के बाहर एक अज्ञात हत्यारे द्वारा खलिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कर दी गई थी। यह कृत्य कनाडा सरकार ने भारत पर थोप दिया था। खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर, मोनिंदर सिंह बुआल, परमिंदर पंगली, भगत सिंह बराड़ जैसे व्यक्ति कनाडा की धरती से अपने खालिस्तान समर्थक एजेंडे को पूरा करने के लिए सिख युवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये युवा सिखों में दुष्प्रचार करते है कि सिख धार्मिक आधार पर भारत में उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। यही प्रचार सोशल मीडिया के माध्यम से कनाडा से पंजाब आता है और इससे युवाओं में प्रधानमंत्री मोदी के विरु( नफरत भर रही है। अब हालात बदल गए है। मोदी सरकार ने इस बार इन किसानों नेताओं को भारी मशीनरी के साथ दिल्ली आने से रोक दिया है। क्योकि देश विरोधी और अलगाववादी ताकतें इस किसान आंदोलन के नाम पर किए जा रहे आंदोलन का फायदा उठाने की फिराक में थीं। दिल्ली चलो किसान आंदोलन को फिर से अलगाववादी अपना समर्थन दे रहे है। इस आंदोलन में भी सिख युवाओं में देश के प्रधानमन्त्री मोदी के प्रति नफरत भरी जा रही है। देश के किसानों को इस तरह की ताकतों का समर्थन नहीं करना चाहिए।

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