MUZAFFARNAGAR-अधिवक्ता को पत्नी सहित किया डिजिटल अरेस्ट, मांगे दस लाख

मुजफ्फरनगर। हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां शहर के एक अधिवक्ता और उनकी पत्नी को अज्ञात साइबर अपराधियों ने वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया। बैंक खाते से करोड़ों के अवैध लेनदेन का झूठा आरोप लगाकर सीबीआई जांच की धमकी दी गई और दस लाख रुपये की मांग की गई। दंपति को मानसिक रूप से गहरी यातनाएं दी गई। बच्चों से संपर्क तक पर पाबंदी लगाई गई। दंपति पैसा देने के लिए भी तैयार हो गया था, लेकिन जब अधिवक्ता ने थाने जाने की बात कही तो फोन कॉल बंद हो गये। पीड़ित अधिवक्ता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी से शिकायत कर अज्ञात ठगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, एसपी क्राइम की जांच के बाद मामले में अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

शहर के पचैंडा रोड अंकित विहार निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता औंकार सिंह तोमर कलेक्ट्रेट कम्पाउण्ड में प्रैक्टिस करते हैं। वो साइबर ठगों की गहरी साजिश का ऐसा शिकार हुए कि आज भी साइबर ठगों के हाथों डिजिटल अरेस्टिंग के वो चंद घंटे उनको झकझोर देते हैं। औंकार सिंह तोमर ने इस घटना को लेकर 17 जून 2025 को एसएसपी से शिकायत की, इसमें वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि साल 2024 के अगस्त माह में योगा एक्सप्रेस ट्रेन से वो गाजियाबाद जा रहे थे, इसी बीच रास्ते में उनका पर्स गुम हो गया, जिसमें उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड के अलावा 21 हजार रुपये नकद भी थे। इसकी शिकायत उन्होंने थाना विजयनगर जनपद गाजियाबाद में की थी।

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अधिवक्ता औंकार तोमर ने अपनी शिकायत में बताया कि 16 जून को वो कलेक्ट्रेट स्थित अपने चैम्बर में कार्य में व्यस्त थे, समय करीब दोपहर 12 बजे उनके फोन पर एक कॉल आई, जिसमें फोन करने वाले ने अपना नाम दीपक गुप्ता बताया और कहा कि उनके नाम से से एक मोबाइल फोन सिम कुलावा, मुंबई में जारी कराया गया है। इसके बाद सिम क्लीयरेंस के के लिए राहुल यादव ने खुद को क्राइम ब्रांच मुंबई से बताकर बात की। क्लीयरेंस के कई सवाल करने के बाद राहुल यादव ने औंकार तोमर को बताया कि उनके नाम से नरेश गोयल नामक व्यक्ति ने एक खाता खुलवाया है, जिसमें 6.8 करोड़ रुपये का अवैध लेनदेन किया गया है। कहा गया कि सुरक्षा की दृष्टि से दफ्तर से घर चले जायें। अधिवक्ता औंकार सिंह यह सुनकर घबरा गये और फोन करने वाली नसीहत पर तत्काल ही अपने घर चले गये और पत्नी से बात की।

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अधिवक्ता के अनुसार करीब दो बजे जब वो पत्नी के साथ चर्चा में व्यस्त थे, उनके पास फिर एक कॉल आई और अज्ञात व्यक्ति ने सीबीआई के नाम से बात की। कहा गया कि परिवार में किसी से भी बात न करें, इसी बीच उनको परेशान देखकर उनकी बेटी पास आई तो दंपति ने उसे भी वहां से भगा दिया। अधिवक्ता ने पुलिस को बताया कि सीबीआई की ओर से बताकर सर्विलांस रूल्स और गिरफ्तारी वारंट व्हाटसएप पर भेजे गये। पूरी रात अधिवक्ता व उनकी पत्नी को डिजिटल अरेस्ट करते हुए मानसिक यातनाएं दी। 17 जून की सुबह साइबर ठगों ने सुप्रीम कोर्ट का एकाउंट फ्रीज और संपत्ति अटैच करने का आदेश पत्र भेजा। किसी को भी फोन या बात करने तक नहीं दिया गया। साइबर ठगों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अधिवक्ता से दस लाख रुपये आरटीजीएस करने के लिए दबाव बनाया। इसके बाद पांच लाख रुपये की मांग पर आ गये। सीबीआई की टीम भेजकर गिरफ्तार करने की धमकी दी गई। अधिवक्ता पैसों के लिए समय मांगते रहे। कहा कि वो पैसा देने को तैयार हो गये और अपनी बैंक पास बुक भी उठा लाये, लेकिन इसी बीच जब साइबर ठगों ने फिर से गिरफ्तारी का भय दिखाया तो अधिवक्ता ने पत्नी सहित खुद ही थाने में जाकर समर्पण की बात कही तो कॉल आनी बंद हो गई। इस तरह से वो एक बड़ी ठगी से बच गये, लेकिन मानसिक उत्पीड़न के कारण उनकी पत्नी की हालत ज्यादा खराब हो गई। एसएसपी ने अधिवक्ता के प्रार्थना पत्र पर एसपी क्राइम को जांच के आदेश दिये। एसएचओ नई मंडी दिनेश बघेल ने बताया कि अधिवक्ता को डिजिटल अरेस्ट करने के मामले में एसएसपी के आदेश पर जांच के बाद अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318-4 एवं 351 और आईटी एक्ट की धारा 66सी व 66डी के अन्तर्गत नई मंडी थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। 

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