कांवड़ यात्रा-सम्प्रदायिक सौहार्द्र की चमक से रोशन यूपी बॉर्डर

मुजफ्फरनगर। श्रावण मास की पावन कांवड़ यात्रा जैसे-जैसे अपने चरम पर पहुँच रही है, उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित मुजफ्फरनगर जनपद का पुरकाजी नगर एक अनूठे सौहार्द्र का केंद्र बन गई है। यहाँ शिवभक्तों का स्वागत न केवल प्रशासनिक स्तर पर हो रहा है, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल पेश करते हुए मुस्लिम चेयरमैन जहीर फारूकी भी पूरी श्रद्धा और सेवा भाव से शिव भक्तों के स्वागत और सत्कार में जुटे हैं।

उत्तराखंड की देवभूमि को विदाई देकर जब कांवड़ यात्रा के श्रद्धालु पुरकाजी बॉर्डर पहुंचे, तो उनका भव्य स्वागत किया जा रहा है। इस स्वागत के कारण यूपी बॉर्डर के नाम से मशहूर इस पुरकाजी नगर में साम्प्रदायिक सौहार्द्र की चमक भी नजर आ रही है। नगर पंचायत पुरकाजी के चेयरमैन जहीर फारूकी ने स्वयं रेड कारपेट बिछवाकर, पुष्पवर्षा के साथ शिवभक्तों का अभिनंदन किया। उन्होंने न केवल पेयजल, विश्राम और खाद्य सामग्री की व्यवस्था सुनिश्चित की, बल्कि मेडिकल सहायता और सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम कराए। मुस्लिम चेयरमैन और भारतीय किसान यूनियन के नेता जहीर फारूकी ने बॉर्डर स्थित भूराहेड़ी चेकपोस्ट को तिरंगा रोशनी से सजाकर उसे एक उत्सव स्थल का रूप दे दिया है। सड़क के दोनों ओर विश्राम शिविर, पेयजल टैंकर, चिकित्सा टीम और भोजन वितरण केंद्र लगाए गए हैं। बॉर्डर पर ही शिव भक्तों के पांव तले रेड कारपेट बिछाया गया है। फारूकी स्वयं पूरे दिन इन व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं।

चेयरमैन फारूकी ने कहा कि कांवड़ यात्रा में आ रहे शिव भक्त हमारे मेहमान हैं और जिस प्रकार से हम अपने घर परिवार में मेहमानों के स्वागत में सब कुछ करते हैं, उनको सम्मान देते हैं, इसी प्रकार यहां पर नगर पंचायत की ओर से हर व्यवस्था की गई है। रेड कारपेट सम्मान का प्रतीक है। हमारा प्रयास है कि जब शिवभक्त उत्तराखंड से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करें, तो उन्हें लगे कि यहां उनका दिल से स्वागत हो रहा है। धर्म कोई दीवार नहीं, बल्कि सेवा और इंसानियत का मार्ग है। उन्होंने बताया कि वे लगातार दो बार निर्विरोध चेयरमैन चुने गए हैं, और पिछले सात वर्षों से कांवड़ यात्रा के दौरान शिव भक्तों की सेवा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते आ रहे हैं। हर साल इसके लिए कुछ नई व्यवस्था की जाती हैं। पुरकाजी में मुस्लिम समुदाय द्वारा शिवभक्तों की सेवा एक स्पष्ट संदेश दे रही है कि भारत की असली पहचान उसकी धार्मिक विविधता में एकता है। यहां मानवता सबसे बड़ा धर्म है। शिवभक्तों ने भी इस सेवा भावना पर खुशी जताते हुए धन्यवाद दिया और कहा कि ऐसा स्वागत पहले कहीं नहीं देखा।

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