MUZAFFARNAGAR PALIKA-विकास के विचार को धरातल पर लाई डॉ. प्रज्ञा सिंह

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् में अधिशासी अधिकारी के रूप में डॉ. प्रज्ञा सिंह ने रविवार को एक वर्ष का सफल कार्यकाल पूर्ण कर लिया। उन्होंने इस एक साल में अपने पदीय दायित्व को सार्थक बनाने का काम किया। शहर के विकास के लिए जो भी विचार लाये गये उनको क्रियान्वित कराने के लिए धरातल पर रहते हुए काम तो किया ही गया, पहली बार शहरवासियों को यह अहसास भी कराया गया कि यदि ठान लिया जाये तो बड़ी चुनौतियों के पहाड़ से भी समाधान के रास्ते निकाले जा सकते हैं। लीगेसी वेस्ट का निस्तारण, कूड़ा डलाव घर बंद कराना, नाइट स्वीपिंग और एमआरएफ सेंटर उनके कार्यकाल की वो प्रमुख उपलब्धियां हैं, जिसके कारण वो जनता के बीच भी एक विशेष छाप छोड़ने में सफल रही हैं।

साल 2023 में शहर को मीनाक्षी स्वरूप के रूप में नई चेयरपर्सन मिलीं, जिन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ सबका विकास के आधार पर शहर के 55 वार्डों में एक समान बिना भेदभाव के विकास कार्य कराकर जनता का दिल जीतने का काम किया। आज चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन उनके नेतृत्व वाले इस बोर्ड को इन उपलब्धियों तक पहुंचाने में पूरी टीम का हाथ है, क्योंकि किसी भी कार्य के लिए आने वाले विचार को क्रियान्वित कर धरातल पर लाने की प्रतिब(ता किसी चुनौती से कम नहीं रहती, ऐसी ही चुनौतियों से निपटने के लिए चेयरपर्सन को अधिशासी अधिकारी के रूप में डॉ. प्रज्ञा सिंह के रूप में एक ऐसी जुनूनी अफसर का साथ मिला, जिन्होंने बड़ी चुनौतियों को न केवल स्वीकार किया, बल्कि उनसे पार पाते हुए समाधान और विकास के नये रास्ते खोलने का काम किया है।

लीगेसी वेस्ट का निःशुल्क निस्तारण कराने का रास्ता हुआ साफ

16 फरवरी 2024 की दोपहर को डॉ. प्रज्ञा सिंह ने मुजफ्फरनगर पालिका में पहली महिला ईओ के रूप में कार्यभार ग्रहण किया तो कई चुनौतियों से उनका सामना होता रहा। किसी निकाय में ईओ के रूप में कार्य करने का यह उनका पहला अवसर था। आज वो इस पद पर रहते हुए एक वर्ष का सफल कार्यकाल पूर्ण कर चुकी हैं। इस दौरान उनको काम करने का अवसर तो कम मिला, लेकिन चुनौतियां काफी रहीं। कई योजनाओं में पालिका के पिछड़ने पर उनको शासन से नाराजगी भी झेलनी पड़ी और कार्यवाही का सामना भी करना पड़ा, लेकिन हर नकारात्मक स्थिति को उन्होंने अपनी सकारात्मक सोच से उपलब्धि में बदलने का काम कर दिखाया है। पालिका की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल लीगेसी वेस्ट के निस्तारण में कोई कदम तक नहीं उठाया गया, जिस कारण एनजीटी से बड़े जुर्माने झेलने पड़े। जिस लीगेसी वेस्ट के लिए पूर्व में करोड़ों के खर्च पर कंपनियों को यहां लाया गया, उसकी लीगेसी वेस्ट का निस्तारण ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने निःशुल्क करने के लिए नीदरलैंड की कंपनी का राजीनामा लेकर बड़ा काम किया।

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कूड़े से कमाई का रास्ता खोला, नाइट स्वीपिंग का अभिनव प्रयोग

साल 2020 में पैसा मिलने के बाद भी पालिका छह एमआरएफ सेंटर नहीं बना पाई, झूठी रिपोर्ट शासन को भेजी गई, कार्यवाही हुई तो ईओ डॉ. प्रज्ञा ने इस चुनौती को भी अपने हाथों में लिया और आज चार एमआरएफ सेंटर बनकर तैयार हैं, जिनमें से एक का संचालन होने जा रहा है और एक माह में दो और चलने लगेंगे। इनके सहारे उन्होंने कूड़े से पालिका की कमाई के विचार को सार्थक बनाने का काम किया। मुख्य मार्ग से कूड़ा डलावघरों को बंद कराया। इतना ही नहीं पहली बार शहर में नाइट स्वीपिंग अभियान चलाया गया, जो अभिनव प्रयोग के रूप में याद किया जा रहा है। साप्ताहिक बंदी में शहरी बाजारों के नाले-नालियों की सफाई का अभियान शुरू हुआ है। वेस्ट टू एनर्जी प्लांट के लिए बंद रास्तों को खोलने की उपलब्धि भी काम के प्रति उनके जुनून की ही देन है। एसटीपी और एफएसटीपी प्लांट बने और उनका संचालन कराया गया। वेस्ट टू वंडर पार्क भी उनका काफी कारगर रहा। सर्दियों में बेसहारा लोगों को शेल्टर होम तक पहुंचाने और अलाव को प्रभावी रखने के लिए वो पूरी रात सड़कों पर दिखाई दी। शेल्टर होम का कायाकल्प कराया। नाइट स्वीपिंग के लिए वो टीम के साथ सर्दी के बीच ही अपनी मासूम बेटी के साथ कई बार औचक निरीक्षण पर निकलीं और इसे प्रभावी रूप से लागू कराया।

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दो चुनाव बने राह में रोडा, काम के लिए मिले सात माह

ईओ प्रज्ञा सिंह का कहना है कि इस एक साल में हम बहुत कुछ करना चाहता थे, लेकिन दो बार चुनाव के कारण आचार संहिता का सामना हमें करना पड़ा। लोकसभा चुनाव और मीरापुर उपचुनाव के कारण करीब पांच महीने काम प्रभावित रहा और हमें काम करने के लिए करीब सात माह का ही समय मिल पाया। कुछ काम शिकायतों के कारण प्रभावित हुए, हमें निर्माण कार्यों और लाइट के टैण्डर निरस्त करने पड़े। अब आशा है कि इस साल हम और बेहतर कार्य करते हुए शहर को विकास के नये आयाम देने में सफल हो पायेंगे। इनमें कंपनी बाग का सौन्दर्यकरण, शहर के चौराहों और पार्कों का सौन्दर्यकरण बड़े प्रोजेक्ट हैं। वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का संचालन और स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर भी हम गंभीर हैं।

चुनौतियों से परिपक्वता बढ़ी, सभी के सहयोग से हम सफलता पा सकेः प्रज्ञा सिंह

मुजफ्फरनगर में कामकाज का एक साल पूरा होने को लेकर ईओ पालिका डॉ. प्रज्ञा सिंह का कहना है कि यहां एक अच्छा अनुभव रहा। पहले ही दिन से उनको अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनसे जूझते हुए जो परिणाम सामने आये, उसके कारण उनकी परिपक्वता भी बढ़ी है। लीगेसी वेस्ट, एमआरएफ सेंटर और सफाई व्यवस्था में सुधार को वो बड़ी उपलब्धियां मानती हैं। उनका कहना है कि कई चुनौतियां आई, ऐसे में चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप, मंत्रियों और जिलाधिकारी तथा निकाय प्रभारी के रूप में एडीएम प्रशासन की ओर से कार्य करने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया गया। चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप के लिए उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य के लिए हमने जो भी मदद उनसे मांगी वो तैयार रहीं। हमारे सुझावों को माना और मार्गदर्शन दिया। मुझे कभी भी अच्छे काम करने से उन्होंने नहीं रोका और किसी गलत काम करने के लिए कोई दबाव नहीं दिया गया। ये मेरे लिए बड़ी बात है। मेरे अधिनस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों का भी सहयोग मिला और बोर्ड का साथ भी हमें रहा, तो ही हम इन चुनौतियों से निपटने में सफल नजर आ रहे हैं।

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मुजफ्फरनगर छोड़ने का बनता रहा मन, स्वास्थ्य संबंधी चुनौती से भी लड़ी

डॉ. प्रज्ञा सिंह तबादला होने के पहले दिन से ही मुजफ्फरनगर में आने का मन नहीं बना पाई थी। डॉ. प्रज्ञा सिंह नगर निगम लखनऊ में कार्यरत थीं, इसी बीच उनका तबादला ईओ के रूप में मुजफ्फरनगर पालिका में कर दिया गया। उनके पति पवन सिंह कानपुर में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। माता पिता और भाई लखनऊ में रहते हैं।

तबादला आदेश जारी होने के साथ ही वो मेडिकल लीव पर चली गई और यह आदेश रुकवाने का प्रयास किया, क्योंकि उनके सामने करीब आठ माह की बेटी पृशा उर्फ किट्टो की परवरिश को लेकर बनी चिंता खड़ी थी, लेकिन नियती कुछ और थी और तबादले के करीब एक पखवाड़े बाद उनको मुजफ्फरनगर आकर कार्यभार ग्रहण करना पड़ा। इसके बाद डॉ. प्रज्ञा को कई चुनौतियों से जूझना पड़ा। बेटी का स्वास्थ्य लगातार खराब रहना के कारण वो कई बार मुजफ्फरनगर से जाने का मन बनाती रही। जब भी वो अवकाश पर लखनऊ गई तो उनके वापस नहीं लौटने की बात भी खूब होती रही, लेकिन हर बार उन्होंने लौटकर दृढ़ता का प्रदर्शन कर काम के प्रति खुद को साबित किया। 

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