सहायक अध्यापक परीक्षा की कॉपियों को कूड़ा गाड़ी में ढुलवाया, डीएम भड़के

कोषागार तक पहुंचाने के लिए कंटेनर से उत्तर पुस्तिकाओं को कूड़ा गाड़ी में भरकर लाने का प्रयास कीया गया, डीएम ने अधिकारियों को लगाई कड़ी फटकार

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से छह दिसंबर को आयोजित होने वाली सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा के लिए 23 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। प्रथम पाली के लिए 15 केंद्र और द्वितीय पाली के लिए आठ केंद्र शामिल हैं। प्रथम पाली में लगभग सात हजार और द्वितीय पाली के लिए लगभग 2800 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। प्रशासन और शिक्षा विभाग इस परीक्षा के सफल आयोजन के लिए पूरी तरह से जुटा हुआ है, लेकिन एक ताजे घटनाक्रम ने सबको चौंका दिया।

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गुरुवार को जिला मुख्यालय पर इस परीक्षा के लिए उत्तर पुस्तिकाएं पहुंची, जिन्हें जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार श्रीवास के नेतृत्व में प्राप्त किया गया। ये उत्तर पुस्तिकाएं एक बड़े कंटेनर में आईं, जो कचहरी परिसर में डीएम कार्यालय के पास तक लाया गया। लेकिन कोषागार में इन कॉपियों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था के लिए कंटेनर ले जाने में जगह छोटी होने के कारण समस्या उत्पन्न हो गई। बताया गया कि इस दिक्कत को हल करने के लिए नगरपालिका परिषद की कूड़ा गाड़ी मंगवाई गई। अधिकारियों ने इन उत्तर पुस्तिकाओं को कंटेनर से उतारकर कूड़ा गाड़ी में भर कर लेजाने का प्रयास किया गया  दिया और उसे कोषागार तक पहुंचाया। इस दौरान गाड़ी में उत्तर पुस्तिकाओं का परिवहन करते हुए कुछ तस्वीरें वायरल हो गईं, जिससे यह घटना और भी सुर्खियों में आ गई।

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उत्तर पुस्तिकाओं को डबल लॉक में सुरक्षित करने के लिए हो रहे कार्य को देखने जिलाधिकारी उमेश मिश्रा मौके पर पहुंचे और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा की स्थिति का जायजा लिया। कूड़ा गाड़ी को देख उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और वहां मौजूद अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। डीएम ने सुरक्षा में चूक को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों से इस पर स्पष्टीकरण भी मांगा। इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार श्रीवास से जानकारी ली गई, तो उन्होंने इस घटना से इनकार किया और कहा कि इस मुद्दे पर एडीएम प्रशासन ही अधिक जानकारी दे सकते हैं। हालांकि, एडीएम से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वह फोन पर उपलब्ध नहीं हो सके। इस घटना ने परीक्षा की सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि इस मामले में संबंधित अधिकारी किस तरह की कार्रवाई करते हैं और क्या भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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