खतौली तहसील में भ्रष्टाचार के खिलाफ वकीलों का आंदोलन सातवें दिन भी जारी, प्रशासन पर गंभीर आरोप

खतौली। तहसील खतौली में कथित भ्रष्टाचार के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन सातवें दिन भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहा। लगातार एक सप्ताह से धरना, नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल न होने से अधिवक्ताओं में नाराजगी और गहरी होती जा रही है।

सोमवार को बार एसोसिएशन खतौली के बैनर तले अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में पैदल मार्च निकालते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान पूरे परिसर में नारे गूंजते रहे। अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसील कार्यालय में लंबे समय से भ्रष्ट आचरण हावी है, जिससे आम जनता के साथ-साथ वकीलों को भी रोजमर्रा के कामकाज में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन कुमार उपाध्याय ने प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने दिनों से आंदोलन चल रहा है, लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने संवाद की पहल तक नहीं की। इससे साफ झलकता है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज कर रहा है।

वहीं, बार के महासचिव प्रदीप कुमार एडवोकेट ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक एसडीएम कोर्ट और तहसीलदार कोर्ट में तैनात पेसकारों के पटल में बदलाव नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि अब अधिवक्ता अपनी शिकायत को लेकर लखनऊ में प्रमुख सचिव, कार्मिक एवं नियुक्ति विभाग के समक्ष जाने की तैयारी कर रहे हैं।

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महासचिव ने जानसठ तहसील बार एसोसिएशन का आभार जताते हुए कहा कि समर्थन स्वरूप आज और कल हड़ताल का निर्णय लिया गया है, जिससे आंदोलन को और बल मिला है।

पूर्व महासचिव सचिन आर्य ने कहा कि पिछले सात दिनों से तहसीलदार और उपजिलाधिकारी कार्यालय के बाहर लगातार धरना दिया जा रहा है, लेकिन किसी भी वरिष्ठ अधिकारी का मौके पर न पहुंचना प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करता है। इससे यह संदेश जा रहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है।

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प्रदर्शन में पूर्व अध्यक्ष जगदीश आर्य, सरदार जितेंद्र सिंह, पूर्व महासचिव दिमाग सिंह, लाल सिंह, नवाब सिंह, राजवीर सिंह, रोशनी सैनी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल रहे।

अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर फैलाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी तहसील प्रशासन की होगी।

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