भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र, राजस्व चौपाल लगाकर एक माह में समस्या निपटाने का आग्रह
मुजफ्फरनगर। खतौनी में नाम और अंश निर्धारण की त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में किसान फार्मर रजिस्ट्री से वंचित हो रहे हैं। इस समस्या को लेकर भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर किसानों की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की है।
खतौनी में नाम एवं अंश निर्धारण की त्रुटियों के कारण प्रदेश के अनेक जिलों में बड़ी संख्या में किसान फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किसानों की फार्मर रजिस्ट्री तैयार करने का अभियान चलाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में भी यह कार्य तेजी से किया जा रहा है, लेकिन रियल टाइम खतौनी में नाम और अंश निर्धारण से जुड़ी त्रुटियों के कारण कई किसान इस प्रक्रिया से बाहर रह गए हैं। राजस्व अभिलेखों में हुई इन गलतियों के चलते किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पत्र में बताया गया कि फार्मर रजिस्ट्री न होने की स्थिति में किसानों के प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं से वंचित होने की आशंका है। इसके अलावा खतौनी में नाम अथवा अंश की त्रुटि के कारण किसानों को कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य कृषि संबंधी सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। किसान नेता ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार द्वारा हाल ही में यह निर्णय लिया गया है कि 1 जून से जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं होगी, उन्हें रासायनिक खाद उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। ऐसे में वे किसान विशेष रूप से चिंतित हैं जिनकी फार्मर रजिस्ट्री राजस्व विभाग की रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियों के कारण अब तक नहीं बन सकी है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के किसान पिछले करीब दो वर्षों से अपनी खतौनी में नाम और अंश से जुड़ी त्रुटियों को ठीक कराने के लिए तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन राजस्व विभाग की धीमी कार्यप्रणाली के कारण समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हो पा रहा है। विभागीय त्रुटियों का सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है, जिससे वे कृषि निवेश, बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं से वंचित हो रहे हैं। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आगामी फसल चक्र में इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
किसान नेता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि प्रत्येक गांव में विशेष राजस्व चौपाल आयोजित कर खतौनी में नाम और अंश निर्धारण से जुड़ी त्रुटियों को अभियान चलाकर अधिकतम एक माह के भीतर ठीक कराया जाए, ताकि किसानों की फार्मर रजिस्ट्री समय पर पूरी हो सके और वे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित न रहें।






