पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का ऐलान, भाजपा के सामने बड़ी परीक्षा

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इन राज्यों में मतदान अप्रैल में होगा, जबकि मतगणना चार मई को होगी। इन चुनावों को केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है, क्योंकि कई राज्यों में पार्टी को पारंपरिक रूप से सीमित समर्थन मिला है।

चुनाव आयोग के अनुसार अलग-अलग राज्यों में मतदान निम्न तिथियों पर होगा: पश्चिम बंगाल: 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान, तमिलनाडु: 23 अप्रैल को एक चरण में मतदान, केरल, असम और पुडुचेरी: 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान, मतगणना: 4 मई 

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इन चुनावों के नतीजे देश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक राजनीतिक ध्यान पश्चिम बंगाल पर केंद्रित है। यहां भाजपा का मुकाबला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मजबूत तृणमूल कांग्रेस मशीनरी से होगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा के 2021 के चुनावों में भाजपा ने प्रमुख विपक्षी दल के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की थी। उस समय 294 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी की सीटें 2016 की तीन सीटों से बढ़कर 77 तक पहुंच गई थीं।

भाजपा इस बार भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे मुद्दों को उठाकर तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ जनसमर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। पश्चिम बंगाल में भाजपा के सामने एक बड़ी चुनौती स्थानीय करिश्माई नेतृत्व की कमी भी मानी जा रही है। जहां भाजपा चुनावी लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा कर रही है, वहीं ममता बनर्जी राज्य में एक मजबूत और प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा बनी हुई हैं। तृणमूल कांग्रेस पिछले 15 वर्षों से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज है। असम में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का दावा कर रहा है।

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सरकार अपनी प्रशासनिक उपलब्धियों और संगठनात्मक मजबूती को चुनावी मुद्दा बना रही है। हालांकि कांग्रेस नीत विपक्ष सत्ता विरोधी माहौल और स्थानीय शिकायतों को मुद्दा बनाकर चुनावी मुकाबले को कठिन बनाने की कोशिश कर रहा है। असम में भाजपा को अल्पसंख्यक मतदाताओं, विशेषकर बांग्ला भाषी मुसलमानों के प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा छह समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की लंबे समय से लंबित मांग भी चुनावी बहस का अहम मुद्दा बन सकती है।

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दक्षिण भारत के राज्यों केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भाजपा अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। केरल में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी। यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस नीत यूडीएफ और माकपा नीत एलडीएफ के बीच माना जाता है। हालांकि हाल के नगर निकाय चुनावों में मिली सफलता से भाजपा को इस बार कुछ बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। कुल मिलाकर, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव केवल क्षेत्रीय राजनीति ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाले चुनाव साबित हो सकते हैं। इन चुनावों के नतीजों पर पूरे देश की राजनीतिक नजर टिकी हुई है।

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