खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के चलते पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पर संकट गहराने की आशंका के बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने गोबर गैस प्लांट योजना को बड़े स्तर पर लागू करने का फैसला लिया है। इस योजना का उद्देश्य एलपीजी गैस का सस्ता और स्थायी विकल्प तैयार करना है, जिससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों को राहत मिल सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना को मिशन मोड पर शुरू करने के निर्देश दिए हैं। शुरुआत में प्रदेश की 7527 गौशालाओं को इस योजना से जोड़ा जाएगा।
वर्तमान में 80 बड़े गौशालाओं में गोबर गैस प्लांट पहले से संचालित हैं, आगे चलकर पशुपालकों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा प्रदेश में कुल 7527 गो-आश्रय स्थल हैं, जहां 12.39 लाख गोवंशीय पशु संरक्षित हैं। इनमें शामिल हैं: 6433 अस्थायी स्थल: 9.89 लाख गोवंश, 518 वृहद गो-संरक्षण केंद्र: 1.58 लाख गोवंश, 323 कान्हा गो-आश्रय: 77,925 गोवंश, 253 कांजी हाउस: 13,576 गोवंश इसके अलावा, मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1.14 लाख गौपालकों को 1.83 लाख गोवंश सौंपे गए हैं।
इस योजना के तहत अब गोबर का उपयोग सिर्फ खाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि: गोबर से गैस उत्पादन कर रसोई गैस का विकल्प तैयार होगा, खेतों में उपयोग होने वाली खाद से यूरिया और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत पूरी होगी गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, यह योजना सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी। ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण रसोई गैस संकट की आशंका को देखते हुए यह रणनीति तैयार की गई है।
सरकार का मानना है कि गोबर गैस प्लांट योजना ग्रामीण क्षेत्रों में तुरंत राहत देने वाली साबित होगी और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत को मजबूत करेगी। LPG पर निर्भरता कम करना ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना, गोशालाओं के अपशिष्ट का बेहतर उपयोग, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना कुल मिलाकर, गोबर गैस प्लांट योजना न सिर्फ ऊर्जा संकट का समाधान है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।






