कंपनी बाग पेड़ कटान मामले में अनियमिता की खुली पोल, होगी एफआईआर

डीएफओ की जांच में खुली पालिका अफसरों के भ्रष्टाचार की पोल, विभाग से बनवाई गई गलत मूल्यांकन रिपोर्ट

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् के अधीन मेरठ रोड स्थित कमला नेहरू वाटिका ;कंपनी बागद्ध से काटे गये फलदार और अन्य पेड़ों के मामले में अब एक नया मोड़ आया है। जिस वन विभाग ने मामले में हुई शिकायत के बाद कंपनी बाग से केवल तीन पेड़ों के कटान की बात कहते हुए ठेकेदार पर तीन पेड़ों को काटने के लिए निम्न जुर्माना लगाकर पटाक्षेप कर दिया था अब उसी विभाग की ओर से मामले को गंभीर और पूर्व मूल्यांकन रिपोर्ट को गलत बताते हुए पेड़ कटान प्रकरण को गंभीर बताते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने का आदेश जारी कर दिया गया है। इससे पालिका प्रशासन में नई हलचल पैदा हो गयी है। मामले में मुख्यमंत्री के आदेश पर एसीएस वन एवं पर्यावरण की देखरेख में शिकायत की जांच अलग से चल रही है, जबकि जिलाधिकारी ने भी प्रकरण में दो सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर रिपोर्ट तलब कर रखी है।
नगरपालिका परिषद् के द्वारा कंपनी बाग में सौन्दर्यकरण का कार्य कराया जा रहा है। शासन के द्वारा इस कार्य के लिए जल निगम की सीएंडडीएस नगरीय इकाई को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। संस्था के द्वारा कंपनी बाग में ठेकेदार फर्म के साथ कार्य कराया जा रहा है। इसी बीच जब 12 अक्टूबर को मोर्निंग वॉकर कंपनी बाग में पहुंचे तो बड़े पैमाने पर उनको पेड़ कटे हुए मिले, जिनमें फलदार वृक्ष भी शामिल थे। इसको लेकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और प्रदर्शन भी किया। लोगों ने प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की। अगले दिन 13 अक्टूबर को हुई नगरपालिका बोर्ड की मीटिंग में भी सभासदों ने इस मुददे को चेयरमैन मीनाक्षी स्वरूप के समक्ष उठाया और पालिका के अधिकारियों की मिलीभगत से कंपनी बाग में करोड़ों रुपये के हरे भरे, फलदार वृक्षों का कटान कराये जाने के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।
प्रकरण में सभासद राजीव शर्मा ने जिलाधिकारी से मिलकर शिकायत की, उनकी शिकायत पर डीएम उमेश मिश्रा ने एडीएम प्रशासन और एसपी क्राइम को जांच सौंपते हुए रिपोर्ट मांगी, जो अभी लम्बित है। वहीं 6 नवम्बर को मुख्मयंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर शिकायत की और शासन स्तर से भी जांच कराने की मांग की। मुख्यमंत्री के विशेष सचिव इशान प्रताप सिंह ने मामले की जांच एसीएस वन एवं पर्यावरण को सौंपी है। इसी प्रकरण में डीएफओ राजीव कुमार का गलत रिपोर्ट दिये जाने पर तबादला कर दिया गया।

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नई रिपोर्ट में खुलासाः हरे-भरे छह पेड़ों का हुआ पतन, बताये गये तीन पेड़
अब इस मामले में नया मोड़ आया है। जिले में नये आये डीएफओ अभिनव राज ने शासन के निर्देश पर कंपनी बाग से काटे गये पेड़ों का मूल्यांकन करने के लिए दोबारा स्थलीय निरीक्षण किया और पूर्व में विभागीय स्तर पर दी गई रिपोर्ट को खारिज कर दिया। इस रिपोर्ट में तथ्यों को छिपाकर मनगढंत रिपोर्ट दिए जाने की बात सामने आई। इस निरीक्षण के बाद डीएफओ अभिनव राज ने पालिका की ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह को पत्र लिखकर अपनी जांच की जानकारी दी और पूर्व रिपोर्ट में बरती गई लापरवाही को भी उजागर किया है।

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सूत्रों के अनुसार डीएफओ अभिनव राज ने विभागीय टीम का गठन कर जांच कराई। बताया गया कि 15 दिसम्बर को डीएफओ ने कमला नेहरू वाटिका में काटे गए विभिन्न प्रजाति के वृक्षों की शिकायत की जांच हेतु क्षेत्रीय वनाधिकारी, मुजफ्फरनगर के नेतृत्व में टीम का गठन किया, क्षेत्रीय वनाधिकारी द्वारा अधीनस्थ रेंज स्टाफ के साथ कमला नेहरू वाटिका का स्थलीय निरीक्षण किया गया, इस दौरान वाटिका में तैनात पालिका के कर्मचारी भी उपस्थित रहे। इसी जांच में पालिका के अधिकारियों का पेड़ कटान से जुड़ा मिलीभगत और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया। डीएफओ ने बताया कि स्थलीय निरीक्षण के दौरान कंपनी बाग में मौके पर जांच दल को कुल छह पेड़, जिनमें एक जामुन, एक सिरस, एक पाम, एक अमरूद दो बेल पत्थर प्रजाति के वृक्ष उखड़ी और गिरी अवस्था में मिले, जिनमें से एक जामुन, एक सिरस एक पाम प्रजाति के वृक्षों का मूल्यांकन नगर पालिका परिषद, मुजफ्फरनगर द्वारा पूर्व में विभाग के माध्यम से कराया गया है परन्तु बाकि फलदार पेड़ों, जिनमें एक अमरूद व दो बेल पत्थर प्रजाति के वृक्षों का मूल्यांकन नगर पालिका परिषद द्वारा नहीं कराया गया और बगैर मूल्यांकन कराए वृक्षों को गिराना या उनका पतन करना गैरकानूनी है, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसके लिए डीएफओ ने ईओ पालिका को आदेश दिये हैं कि वो इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्था के खिलाफ तत्काल स्तर पर एफआईआर दर्ज करायें।

एनीमल-वाइल्ड लाइफ एक्ट में भी कराएंगे कार्रवाईः राजीव शर्मा
मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद् के कंपनी बाग में पेड़ों के कटान के मामले में प्रशासन से शासन तक शिकायत करने वाले सभासद राजीव शर्मा ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है, पालिका के अधिकारी और सम्बंधित ठेकेदार आपसी साठगांठ से कीमती पेड़ों का कटान कर अनुचित लाभ उठाने की साजिश रच रहे थे। इस मामले में कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फलदार वृक्षों का कटान होने के साथ ही जीव हत्या भी की गई है। पेड़ों में पक्षियों के घौंसले थे, जिनमें नया जीवन भी पनप रहा था। वो नष्ट हुए हैं, इसमें हम जल्द ही एनीलम और वाल्ड लाइफ एक्ट के अन्तर्गत भी जांच की मांग करते हुए कार्रवाई कराएंगे। उन्होंने कहा कि वन विभाग की ताजा रिपोर्ट से साफ हो गया है कि पालिका के अधिकारी इस प्रकरण में कितने संलिप्त हैं, दोषियों को बचाने के लिए गलत मूल्यांकन रिपोर्ट बनवाई गई। वो मांग करते हैं कि डीएफओ की रिपोर्ट पर जल्द ही एफआईआर दर्ज कराई जाये। सभासद राजीव शर्मा ने कहा कि इस प्रकरण में शुरूआत से ही वाटिका प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय प्रताप शाही की भूमिका सवालों के घेरे में हैं। उनका लगातार बचाने का प्रयास किया जा रहा है और इसी कारण वन विभाग से गलत मूल्यांकन रिपोर्ट बनवाई गई, जो अब डीएफओ की दूसरी जांच में साबित भी हो गया है। हम जनहितों के विपरीत अधिकारियों के द्वारा फलाई जा रही भ्रष्टाचार की इस बेल को जड़ से उखाड़कर ही रहेंगे। 

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