नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईंधन आपूर्ति पर दबाव के हालात में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए कमर्शियल एलपीजी सप्लाई को 70% तक बहाल कर दिया है। इस फैसले से श्रम-प्रधान उद्योगों और दुकानदारों को सीधे तौर पर राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार के इस निर्णय के बाद राज्यों को अब संकट से पहले के स्तर का 70% तक एलपीजी आवंटन मिलेगा, जिससे उत्पादन और सप्लाई चेन पर पड़ा दबाव कम हो सकता है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गैर-घरेलू एलपीजी के आवंटन में वृद्धि करते हुए इसे 70% तक बहाल करने का निर्णय लिया है। 27 मार्च 2026 को पेट्रोलियम सचिव डॉ. नीरज मित्तल द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए पत्र में इस फैसले की जानकारी दी गई। इससे पहले उद्योगों को केवल 50% एलपीजी आवंटन मिल रहा था, जिसे अब 20% बढ़ाकर 70% कर दिया गया है। सरकार ने मार्च महीने में जारी 16, 18 और 21 तारीख के निर्देशों के बाद यह कदम उठाया है।
शुरुआत में राज्यों को केवल 40% आवंटन दिया गया था, अतिरिक्त 10% कोटा सुधारों से जोड़ा गया था, अब नया 20% अतिरिक्त आवंटन सीधे बढ़ाया गया है कई राज्यों ने सुधार शर्तें पूरी कर पहले ही अतिरिक्त कोटा हासिल कर लिया था। श्रम-प्रधान सेक्टर होंगे प्राथमिकता में सरकार का नया फैसला खासतौर पर इन सेक्टरों के लिए राहत लेकर आया है: स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, पेंट, केमिकल, प्लास्टिक ये उद्योग विशेष हीटिंग प्रक्रियाओं के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं और फिलहाल प्राकृतिक गैस पर स्विच करना इनके लिए आसान नहीं है।
सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि: उद्योग पंजीकरण मानदंडों का पालन करें, जहां संभव हो, पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करें, प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश 2026 को तेजी से लागू किया जाए पिछले कुछ हफ्तों से कच्चे माल और ईंधन की कमी से जूझ रहे उद्योगों को इस फैसले से राहत मिलने की उम्मीद है। उत्पादन लागत पर दबाव कम होगा और सप्लाई चेन में आई रुकावट धीरे-धीरे सुधर सकती है, जिससे बाजार में स्थिरता आने के संकेत हैं।






