शिवसेना ने मुजफ्फरनगर में निजी और पब्लिक स्कूलों की फीस, ड्रेस और किताबों को लेकर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालने का मुद्दा उठाया गया है। शिवसेना, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर से शिक्षा मंत्री के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से दिया गया, जिसमें प्राइवेट स्कूलों पर अभिभावकों के शोषण का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर न होने के कारण बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर हैं। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर कई प्राइवेट और पब्लिक स्कूल शिक्षा का व्यवसायीकरण कर रहे हैं। आरोप लगाया गया है कि स्कूल प्रबंधन महंगी फीस, महंगी ड्रेस और महंगे पाठ्यक्रम के नाम पर अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।
ज्ञापन के अनुसार, कई स्कूलों में बच्चों के लिए एक खास प्रकाशन की किताबें तय कर दी जाती हैं और अभिभावकों पर उन्हें निश्चित दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जाता है। ड्रेस और पाठ्यक्रम के नाम पर मनमानी वसूली का भी आरोप लगाया गया है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि एक ही स्कूल में पढ़ रहे छात्र के अगली कक्षा में जाने पर फिर से प्रवेश जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे अभिभावकों पर बेवजह आर्थिक भार पड़ता है।
शिवसेना ने अपने ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, एक ही स्कूल में पढ़ने वाले छात्र को अगली कक्षा में भेजते समय दोबारा एडमिशन प्रक्रिया बंद की जाए। दूसरी, पाठ्यक्रम और ड्रेस खरीदने के लिए अभिभावकों को कहीं से भी सामान लेने की स्वतंत्रता दी जाए और उन्हें तय दुकानों से खरीदने के लिए मजबूर करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई हो। तीसरी, हर कक्षा की फीस तय की जाए और उसका उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जाए।
ज्ञापन पर शिवसेना के जिला अध्यक्ष विद्युत सिखेड़ा समेत अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। संगठन ने कहा है कि अगर अभिभावकों के हित में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इस मुद्दे को और व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।






