सहारनपुर/चिलकाना। थाना चिलकाना क्षेत्र के गांव गयाजुद्दीनपुर निवासी किसान ने अपनी भूमिधरी जमीन पर कब्जे के प्रयास, गेहूं की फसल और पॉपलर के पेड़ काटने के आरोप लगाते हुए पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। किसान रामपाल पुत्र रामसिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर मामले में एफआईआर दर्ज कराए जाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।
किसान का कहना है कि वह खसरा संख्या 603, 604 और 605 की भूमि का वैध भूमिधर है। आरोप है कि कुछ नामजद लोग उसकी जमीन पर जबरन कब्जा करना चाहते हैं। किसान ने अपने शिकायती पत्र में हल्का लेखपाल पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि पुलिस या प्रशासनिक जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।
किसान का दावा—चकबंदी और पुलिस की मौजूदगी में मिला था कब्जा
पीड़ित किसान रामपाल का कहना है कि जमीन को लेकर पहले चकबंदी विभाग में मामला चला था। उसके अनुसार 30 जनवरी 2025 को चकबंदी विभाग के कर्मचारियों और थाना चिलकाना पुलिस की मौजूदगी में पैमाइश कराकर उसे जमीन पर कब्जा दिलाया गया था।
किसान का आरोप है कि कब्जा मिलने के बाद उसने जमीन में गेहूं की फसल बोई थी और पॉपलर के पेड़ लगाए थे। लेकिन इसके बाद विवाद फिर खड़ा हो गया।
प्रार्थना पत्र के अनुसार किसान ने आरोप लगाया है कि अप्रैल माह में कुछ लोगों ने उसकी गेहूं की फसल जबरन काटनी शुरू कर दी। विरोध करने पर आरोपियों ने उसके साथ अभद्रता और मारपीट का प्रयास किया। किसान का दावा है कि 17, 18 और 19 अप्रैल को उसकी गेहूं की फसल काट दी गई।
रामपाल का कहना है कि गेहूं की फसल कटने से उसे करीब एक लाख रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं पॉपलर के पेड़ काटे जाने से लगभग दो लाख रुपये की क्षति होने का दावा किया गया है। किसान ने कुल नुकसान की भरपाई आरोपियों और संबंधित जिम्मेदारों से कराने की मांग की है।
7 मई को फिर कब्जे के प्रयास का आरोप
किसान ने अपने नए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि 7 मई 2026 को फिर से उसकी भूमि पर कब्जे का प्रयास किया गया। उसका कहना है कि कुछ लोग हल्का लेखपाल के साथ मिलकर खसरा संख्या 603, 604 और 605 पर जबरन कब्जा करना चाहते थे।
किसान के अनुसार उसने इसकी सूचना नजदीकी पुलिस चौकी टोदरपुर को दी। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और अवैध कब्जे की कोशिश को रुकवाया गया। किसान का कहना है कि अगर समय रहते पुलिस मौके पर नहीं पहुंचती तो उसकी जमीन पर फिर कब्जा कर लिया जाता।
रामपाल ने SSP सहारनपुर से मांग की है कि मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। किसान ने यह भी कहा कि उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं और वह अपनी जमीन व फसल के नुकसान को लेकर परेशान है।
शिकायती पत्र में किसान ने चेतावनी भी दी है कि यदि उसे न्याय नहीं मिला और उसकी जमीन सुरक्षित नहीं कराई गई, तो वह मुख्यमंत्री कार्यालय लखनऊ जाकर कड़ा कदम उठाने को मजबूर होगा।
इस पूरे मामले में किसान ने गंभीर आरोप लगाए हैं। जमीन विवाद, फसल काटने, पॉपलर के पेड़ काटने और लेखपाल की मिलीभगत जैसे आरोपों की जांच जरूरी है। पुलिस और प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किसान के दावों में कितनी सच्चाई है और किन लोगों की भूमिका सामने आती है।






