परिजनों के साथ ग्रामीणों ने रामपुर तिराहा चौकी का घेराव कर जनता आक्रोश, चिकित्सक और स्टाफ फरार, कार्रवाई की मांग
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा स्थित भारद्वाज नर्सिंग होम में डिलीवरी के दौरान एक गर्भवती महिला की मौत के बाद सोमवार को जमकर हंगामा हो गया। परिजनों ने नर्सिंग होम प्रबंधन और चिकित्सकीय स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। घटना के बाद पुलिस ने अस्पताल पर ताला लगाकर जांच शुरू कर दी, जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की। प्रारंभिक जांच में नर्सिंग होम के अवैध रूप से संचालित होने की आशंका भी जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद के सिडकुल रोशनाबाद क्षेत्र के ग्राम खाला टीहरा निवासी नीटू पाल अपनी गर्भवती पत्नी कोमल को प्रसव के लिए रामपुर तिराहा स्थित भारद्वाज नर्सिंग होम लेकर पहुंचे थे। परिजनों का कहना है कि उन्हें परिचितों द्वारा अस्पताल की चिकित्सा सुविधाओं के बारे में भरोसा दिलाया गया था। बताया गया कि 21 जून की शाम प्रसव पीड़ा होने पर कोमल को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के बाद चिकित्सकों ने सामान्य प्रसव संभव न बताते हुए ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। परिजनों के अनुसार ऑपरेशन से पहले महिला की हालत सामान्य थी, लेकिन ऑपरेशन के दौरान उसकी स्थिति अचानक बिगड़ गई।

मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया कि जब महिला की हालत गंभीर हुई तो जिम्मेदार डॉक्टरों ने ऑपरेशन टेबल पर मरीज को छोड़ दिया और अस्पताल से चले गए। इसी दौरान महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। परिजनों का कहना है कि अस्पताल स्टाफ ने उन्हें तत्काल किसी बड़े अस्पताल में ले जाने की सलाह दी। इसके बाद कोमल को मेरठ स्थित सुभारती अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
महिला की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजन मंगलवार सुबह शव को लेकर पुनः भारद्वाज नर्सिंग होम पहुंचे और वहां जमकर हंगामा किया। बाद में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ रामपुर तिराहा पुलिस चौकी पहुंचकर घेराव और प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। मृतका के पति नीटू पाल ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि नर्सिंग होम में योग्य चिकित्सकों की अनुपस्थिति में ऑपरेशन किया गया, जिसके कारण उनकी पत्नी की जान चली गई। परिजनों का यह भी कहना है कि उन्हें ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों की योग्यता और पहचान के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।
एक सप्ताह पहले सुमित नामक युवक को किराये पर दिया था नर्सिग होम

उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में कथित रूप से अयोग्य और गैर-पंजीकृत लोगों द्वारा चिकित्सा कार्य कराया जा रहा था, जिससे यह दर्दनाक घटना हुई। पीड़ित परिवार ने नर्सिंग होम संचालक, संचालिका तथा ऑपरेशन में शामिल चिकित्सकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से यह दावा किया गया कि नर्सिंग होम को लगभग एक सप्ताह पहले सुमित पाल नामक व्यक्ति को किराए पर दिया गया था। हालांकि अस्पताल के नाम, दस्तावेजों और पर्चियों में अभी तक कोई बदलाव नहीं किया गया था। इस दावे के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है और जांच एजेंसियां अस्पताल के वास्तविक संचालन और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
सीएमओ ने गठित की जांच समिति, अस्पताल से एक हिरासत में लिया
हंगामे और शिकायत के बाद पुलिस ने अस्पताल से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया तथा परिसर पर ताला जड़ दिया। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। डिप्टी सीएमओ डॉ. महेश सिंह और डॉ. अजय कुमार ने अस्पताल का निरीक्षण कर दस्तावेजों की जांच की। सीएमओ कार्यालय की ओर से गठित टीम ने अस्पताल के संचालन, पंजीकरण और चिकित्सा व्यवस्थाओं की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक स्तर पर नर्सिंग होम के अवैध रूप से संचालित होने की आशंका जताई गई है। बताया गया कि यहां बीएएमएस चिकित्सक डॉ. रेखा पंवार चिकित्सा सेवाएं दे रही थीं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तहरीर, मेडिकल दस्तावेजों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट भी कार्रवाई का आधार बनेगी। फिलहाल नर्सिंग होम को सील कर दिया गया है और संबंधित अधिकारियों द्वारा पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है।





