लखनऊ। अलकायदा इन द इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) की विचारधारा से कथित रूप से जुड़े मॉड्यूल की जांच कर रही उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। एटीएस ने तमिलनाडु एटीएस के सहयोग से 19 वर्षीय मकसूद अली को कोयंबटूर से गिरफ्तार किया। उसे ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया गया है।
एटीएस का दावा है कि मकसूद अली सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित करने वाले नेटवर्क से जुड़ा था। जांच एजेंसी ने उसके पाकिस्तानी हैंडलरों एवं हैकरों के संपर्क में होने और कथित रूप से साइबर टूल तैयार करने का भी आरोप लगाया है।
सिद्धार्थनगर का रहने वाला है मकसूद अली
मकसूद अली मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में बांसी थाना क्षेत्र अंतर्गत मधवापुर गांव का निवासी है। वह वर्तमान में तमिलनाडु के कोयंबटूर में रह रहा था।
एटीएस के अनुसार, मकसूद को 14 सितंबर को तमिलनाडु एटीएस की सहायता से गिरफ्तार किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया गया, जहां संबंधित न्यायालय के समक्ष पेश कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
नबील की गिरफ्तारी के बाद सामने आया नाम
इस मामले में यूपी एटीएस ने 12 सितंबर को आजमगढ़ से मोहम्मद नबील को गिरफ्तार किया था। नबील से पूछताछ और जांच के दौरान मकसूद अली का नाम कथित नेटवर्क के एक अन्य सदस्य के रूप में सामने आया।
एटीएस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 और 61(2) के साथ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 18 एवं 38 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और डिजिटल संपर्कों की पड़ताल कर रही है।
सोशल मीडिया समूहों के माध्यम से युवाओं को जोड़ने का आरोप
एटीएस का आरोप है कि इस कथित मॉड्यूल से जुड़े लोग सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर समूह बनाकर युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित करने का प्रयास कर रहे थे। युवाओं को हिंसक गतिविधियों, धन एकत्र करने और हथियारों का प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित करने की योजना होने का भी दावा किया गया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित नेटवर्क से भारत के विभिन्न राज्यों के लोगों के साथ कुछ विदेशी व्यक्तियों के भी जुड़े होने की जानकारी मिली है। आरोपियों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया खातों और ऑनलाइन संवाद की जांच की जा रही है।
पाकिस्तानी हैंडलरों से संपर्क का दावा
एटीएस का दावा है कि मकसूद अली कथित रूप से पाकिस्तान में मौजूद हैंडलरों और हैकरों के संपर्क में आया था। वह उनके संपर्क में रहकर साइबर गतिविधियों के लिए हैकिंग टूल विकसित करने की कोशिश कर रहा था।
पूछताछ में मकसूद ने कथित रूप से बताया कि उसने पायथन, जावा, कोडिंग और हैकिंग संबंधी जानकारी ऑनलाइन संसाधनों, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, टेलीग्राम तथा विभिन्न व्हाट्सऐप समूहों के माध्यम से हासिल की थी।
‘कैप्टन एम नेटवर्क’ नाम से एप बनाने का आरोप
जांच एजेंसी का कहना है कि मकसूद ने कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच सुरक्षित संवाद के लिए ‘कैप्टन एम नेटवर्क’ नाम का एक एप्लीकेशन विकसित किया था। एटीएस के अनुसार, इसी माध्यम से मकसूद, नबील और अन्य संदिग्ध आपस में संपर्क में थे।
जांच में मकसूद के कई व्हाट्सऐप समूहों से जुड़े होने की बात भी सामने आई है। एटीएस का दावा है कि इनमें पाकिस्तानी नंबरों से जुड़े कुछ संदिग्ध और कथित हैकर भी शामिल थे। इन समूहों के माध्यम से कट्टरपंथी सामग्री प्रसारित किए जाने का आरोप है।
AQIS से संबंधित सामग्री साझा करने का आरोप
मकसूद अली कथित रूप से मोहम्मद नबील द्वारा बनाए गए एक व्हाट्सऐप समूह से भी जुड़ा था। एटीएस का आरोप है कि इस समूह में प्रतिबंधित संगठन AQIS से संबंधित साहित्य, हिंसक विचारधारा वाली सामग्री और आपत्तिजनक वीडियो साझा किए जा रहे थे।
एटीएस अब डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन खातों की जांच कर कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है। सभी आरोप जांच का विषय हैं और न्यायालय में दोष सिद्ध होना शेष है।
