मुजफ्फरनगर-बच्चे की मौत पर एसीएन हॉस्पिटल में भाकियू का हंगामा

प्रसव के दौरान बिगड़ी महिला की हालत, बीच में ही कर दिया रैफर, दूसरे अस्पताल में नवजात की मौत, महिला चिकित्सक पर परिजनों ने लगाए आरोप, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ओटी और लेबर रूम किए सील

मुजफ्फरनगर। रुड़की रोड स्थित एसीएन हॉस्पिटल में प्रसव के दौरान उपचार को लेकर विवाद खड़ा हो गया। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान उचित उपचार नहीं मिलने और समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने से महिला की हालत बिगड़ गई। बाद में महिला और नवजात को गंभीर अवस्था में ही दूसरे अस्पताल रैफर कर दिया, जहां नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों के साथ पहुंचे भाकियू कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में हंगामा करते हुए कार्रवाई की मांग की। मामले की जांच करने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पंजीकरण संबंधी दस्तावेज नहीं मिलने पर ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम सील कर दिए।

परिजनों के अनुसार, लद्दावाला निवासी अनस की पत्नी नाजमीन को प्रसव के लिए एसीएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नाजमीन को 12 अक्टूबर की शाम प्रसव के लिए परिजन एसीएन हॉस्पिटल में लाए थे। बुधवार, 14 अक्टूबर की सुबह प्रसव के दौरान बच्चा फंसने की स्थिति बनी। परिजनों का आरोप है कि मशीन के जरिए प्रसव कराने का प्रयास किया गया, लेकिन महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि अस्पताल में समय पर सर्जन और बेहोशी के चिकित्सक उपलब्ध नहीं हो पाए। इसके बाद सुबह करीब पांच बजे महिला और नवजात को दूसरे अस्पताल रेफर किया गया। वहां नवजात की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।

इसे भी पढ़ें:  कानपुर VIP रोड पर रईसजादे का कहर, लैंबॉर्गिनी से कई को रौंदा, शिवम मिश्रा हिरासत

मामले की जानकारी मिलने पर भारतीय किसान यूनियन टिकैत के पदाधिकारी गुलबहार राव और संगठन के अन्य कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचे। स्थानीय लोगों की मौजूदगी में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ विरोध जताया गया। उन्होंने मौके पर मिली महिला चिकित्सक के खिलाफ भी आक्रोश जताया। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हंगामे की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास किया। सीएमओ के निर्देश पर एसीएमओ महक सिंह ने टीम के साथ एसीएन हॉस्पिटल पहुंचकर जांच की। उन्होंने बताया कि शिकायत नवजात की मौत और उपचार में कथित लापरवाही से संबंधित थी। जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन से पंजीकरण संबंधी दस्तावेज मांगे गए, लेकिन संचालक वैध पंजीकरण का प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। महिला चिकित्सक की ओर से आयुर्वेद विभाग में पंजीकरण के लिए आवेदन करने की बात कही गई, लेकिन आवेदन की रसीद भी उपलब्ध नहीं कराई गई।

इसे भी पढ़ें:  गंगा घाट पर स्नान को लेकर अलर्ट दिखी फोर्स, अफसरों ने किया पैदल मार्च

एसीएमओ के अनुसार, चिकित्सकों के वैध दस्तावेज और मरीज को रेफर करने से संबंधित स्लिप भी मौके पर नहीं दिखाई गई। इन परिस्थितियों में एहतियाती कार्रवाई करते हुए अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम को सील कर दिया गया है। मामले की विस्तृत रिपोर्ट सीएमओ को भेजी जाएगी। इसके बाद गठित चिकित्सकीय पैनल उपचार संबंधी तथ्यों की जांच करेगा। अस्पताल के पंजीकरण की स्थिति जानने के लिए आयुर्वेद विभाग से भी जानकारी मांगी जा रही है। अस्पताल की महिला चिकित्सक ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नाजमीन की हालत पहले से गंभीर थी और भर्ती के समय उसके प्लेटलेट्स कम थे। मंगलवार की रात करीब दो बजे भी उसका परीक्षण किया गया था। चिकित्सक के मुताबिक, ऑपरेशन की आवश्यकता बन रही थी, लेकिन समय पर सर्जन और बेहोशी के चिकित्सक उपलब्ध नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया गया और महिला की हालत के बारे में परिजनों को जानकारी दी गई थी। स्थिति बिगड़ने पर परिजन महिला को दूसरे अस्पताल ले गए।

इसे भी पढ़ें:  बुढ़ाना में सरकारी जमीन पर कब्जाः डीएम के आदेश पर भारी प्रताप पटवारी!
Share This Article