माया का दावा-दंगे के डर से मुजफ्फरनगर में किसी मुस्लिम ने नहीं लिया टिकट

मुजफ्फरनगर। बसपा अध्यक्ष मायावती ने मंच से अपने सम्बोधन के दौरान खास तौर पर मुस्लिमों को फोकस किया। उन्होंने मुजफ्फरनगर सीट से दार सिंह के टिकट को लेकर हुए मंथन की पूरी कहानी को जनता के बीच मौजूद मुस्लिमों के समक्ष रखते हुए साफ किया कि बसपा में मुस्लिमों की उपेक्षा नहीं हुई है। वो चाहती थी कि मुजफ्फरनगर से किसी मुस्लिम लीडर को चुनाव लड़ाया लेकिन यहां दंगा होने के डर से किसी मुस्लिम ने टिकट ही नहीं लिया। इसलिए उन्होंने सहारनपुर और हरिद्वार से मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया, जो बिजनौर से जाट और कैराना से राजपूत प्रत्याशी चुनाव मैदान में लाकर सर्वसमाज को सम्मान देने का काम किया है।

मायावती ने उत्तराखंड और यूपी में रविवार को तीन चुनावी जनसभाओं को सम्बोधित किया और तीनों ही स्थानों पर मुस्लिमों पर उनका खासा फोकस रहा। वो यहां भी दलित मुस्लिम समीकरण का संदेश देकर गई। उन्होंने अपना शासन और व्यवस्था याद दिलाते हुए कहा कि बसपा के राज में मुजफ्फरनगर ही नहीं, बल्कि पूरी यूपी में कोई भी दंगा या सम्प्रदायिक संघर्ष नहीं हुआ। सपा सत्ता में आई और यहां भाईचारा तोड़ दिया गया। जाट और मुस्लिमों को लड़ाया गया। हमने यहां पर भाईचारा कायम किया था। उसी भाईचारे को जिंदा रखने के लिए मेरी तमन्ना थी कि मुजफ्फरनगर सीट पर कोई मुस्लिम लीडर बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े।

इसके लिए हमने प्रयास किये, लेकिन मुस्लिम इतने डरे हुए हैं कि उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ा तो यहां दंगा हो जायेगा। इसलिए ही मजबूरन हमने यहां ओबीसी वर्ग के दारा सिंह को टिकट दिया। दारा को मैं मेरठ से भी चुनाव लड़ा सकती थी, लेकिन मुस्लिमों के डर के कारण हमने फैसला बदला और मुजफ्फरनगर के ही रहने वाले पूर्व विधायक मौलाना जमील को हरिद्वार सीट से तो सहारनपुर में माजिद अली को टिकट देकर इस टीस को पूरा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि हमने समीकरण नहीं बिगाड़ा, किसी की उपेक्षा नहीं की। बिजनौर से जाट तो कैराना से राजपूत समाज को टिकट दिया गया है। हरिद्वार से मौलाना जीते तो मुजफ्फरनगर की जनता को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा। उन्होंने सर्वसमाज से बसपा के लिए वोट करने की अपील की। 

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