नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 रविवार, 1 फरवरी को लोकसभा में पेश किया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सुबह 11 बजे बजट भाषण के दौरान युवाओं को केंद्र में रखते हुए ‘युवाशक्ति’ को इस बार का थीम बताया। बजट का फोकस राष्ट्र निर्माण, आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के तीन प्रमुख कर्तव्यों पर रहा।
इनकम टैक्स के मोर्चे पर सरकार ने स्लैब्स में बड़ा बदलाव नहीं किया, लेकिन कंप्लायंस, TDS-TCS नियमों, पेनल्टी और फाइलिंग सिस्टम में ऐसे सुधार किए गए हैं, जिनसे छोटे करदाताओं, युवाओं और मिडिल क्लास को सीधी राहत मिलती है। सबसे बड़ा ऐलान रहा—नया इनकम टैक्स एक्ट, जो 1961 के कानून की जगह लेगा।
नया इनकम टैक्स एक्ट क्या है और कब लागू होगा?
सरकार ने टैक्स सिस्टम को सरल और मुकदमेबाजी-मुक्त बनाने के लिए नया इनकम टैक्स एक्ट लाने का फैसला किया है।
मुख्य बातें:
लागू होने की तारीख: 1 अप्रैल 2026
1961 के पुराने एक्ट की जगह लेगा
कम सेक्शन, आसान भाषा और सरल कंप्लायंस
ITR-1 और ITR-2 को आम करदाताओं के लिए री-डिज़ाइन किया गया
ITR फाइलिंग में राहत:
रेगुलर ITR की डेडलाइन पहले जैसी
रिवाइज्ड रिटर्न अब 31 मार्च तक फाइल की जा सकेगी (पहले 31 दिसंबर)
सरकार का उद्देश्य साफ है—न्यू टैक्स रिजीम को बढ़ावा देना और टैक्स सिस्टम को कम जटिल बनाना।
टैक्स स्लैब्स में क्या बदला? (New vs Old Regime)
बजट 2026 में टैक्स स्लैब्स को ज्यों का त्यों रखा गया है। सरकार ने दरें बदलने के बजाय सिस्टम को आसान बनाने पर फोकस किया।
न्यू टैक्स रिजीम (डिफॉल्ट)
स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹75,000
सेक्शन 87A के तहत रिबेट से ₹12.75 लाख तक की आय प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री
कम रेट, लेकिन सीमित डिडक्शंस
ओल्ड टैक्स रिजीम
स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹50,000
80C, HRA, होम लोन जैसी छूट जारी
₹5 लाख तक टैक्स-फ्री (रिबेट के साथ)
कम निवेश/डिडक्शन वालों के लिए न्यू रिजीम ज्यादा फायदेमंद बनी हुई है।
TDS-TCS और एक्सेम्प्शन में बड़ी राहत
स्लैब नहीं बदले, लेकिन टैक्स कटौती और नियमों में बड़ी ढील दी गई—
TCS में कटौती
- विदेशी पढ़ाई, मेडिकल खर्च और ओवरसीज टूर पर 5% से घटाकर 2%
- LRS के तहत रेमिटेंस भी सस्ता
एक्सेम्प्शन
- मोटर एक्सीडेंट क्लेम और उस पर ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री
- इस पर TDS भी नहीं कटेगा
TDS नियम आसान
- NRI प्रॉपर्टी बिक्री पर अब TAN की जरूरत नहीं, सिर्फ PAN से TDS
- मैनपावर सप्लाई और हायरिंग सर्विस पर TDS स्ट्रक्चर सरल
पेनल्टी और इम्यूनिटी में नरमी
सरकार ने छोटे टैक्स उल्लंघनों पर सख्ती कम की है—
- ₹20 लाख से कम इनकम छुपाने पर, सिर्फ फाइन, कोई क्रिमिनल केस नहीं
- मिस-रिपोर्टिंग मामलों में भी पेनल्टी से इम्यूनिटी
- बड़े मामलों में सख्त कार्रवाई जारी
किसे कितना फायदा? उदाहरणों से समझें
सैलरीड मिडिल क्लास
₹10 लाख सैलरी (न्यू रिजीम):
- टैक्सेबल इनकम ≈ ₹9.25 लाख
- टैक्स बोझ ओल्ड के मुकाबले ₹5–10 हजार कम
युवा और स्टूडेंट्स
₹20 लाख विदेशी पढ़ाई रेमिटेंस:
- TCS पहले: ₹1 लाख
- अब: ₹40,000 (₹60,000 की सीधी बचत)
NRI और प्रॉपर्टी ओनर
- TAN की झंझट खत्म
- एडमिन और लीगल खर्च में ₹5–10 हजार की बचत
सीनियर और छोटे टैक्सपेयर्स
- 15G/15H और Nil TDS सर्टिफिकेट आसान
- FD ब्याज पर TDS से राहत
एक्सीडेंट क्लेम
₹5.5 लाख क्लेम + ब्याज
- पहले टैक्स लगता था
- अब पूरा अमाउंट टैक्स-फ्री
अब टैक्सपेयर्स क्या करें?
- इनकम ₹12–13 लाख तक है → न्यू रिजीम बेहतर
- ज्यादा डिडक्शन हैं → ओल्ड रिजीम तुलना करें
- आयकर पोर्टल के कैलकुलेटर से पहले गणना करें
- बड़े फैसले से पहले प्रोफेशनल सलाह लें
बजट 2026 ने टैक्स स्लैब नहीं बदले, लेकिन टैक्स सिस्टम को हल्का, साफ बना दिया है। युवाओं, मिडिल क्लास और छोटे टैक्सपेयर्स के लिए यह बजट राहत और सरलता—दोनों लेकर आया है।






