शहर के एक परीक्षा केन्द्र पर सुरक्षा बंदोबस्त को लेकर उठे सवाल, मोबाइल से नकल कराने के आरोप, अभ्यर्थियों ने किया हंगामा
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में आयोजित लेखपाल भर्ती परीक्षा उस समय विवादों में घिर गई जब परीक्षा केंद्र पर मोबाइल फोन के जरिए नकल कराने के आरोप सामने आए। अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए केंद्र पर जमकर हंगामा किया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। घटना के बाद भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुजफ्फरनगर जनपद के नई मंडी क्षेत्र के दीपचंद ग्रेन चैंबर इंटर कॉलेज में बृहस्पतिवार को आयोजित लेखपाल भर्ती परीक्षा के दौरान नकल कराने के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्र पर तैनात एक सिपाही मोबाइल फोन के माध्यम से प्रश्नों के उत्तर हल करा रहा था। मामले की जानकारी फैलते ही परीक्षा केंद्र पर मौजूद अभ्यर्थियों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
अभ्यर्थियों के अनुसार परीक्षा केंद्र के कक्ष संख्या-23 में कथित रूप से मिलीभगत के साथ मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि कुछ परीक्षार्थियों को मोबाइल के जरिए प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराए जा रहे थे। इस दौरान एक सिपाही को मोबाइल फोन के साथ पकड़े जाने की भी चर्चा रही, लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि मामले को दबाने का प्रयास किया गया और तत्काल कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई।
घटना के बाद केंद्र पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह की घटनाएं मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। उनका कहना था कि परीक्षा केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद मोबाइल फोन का इस्तेमाल होना सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक को दर्शाता है।
अभ्यर्थियों ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, परीक्षा केंद्र की सीसीटीवी फुटेज खंगालने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कठोर कदम नहीं उठाए गए तो भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा। फिलहाल मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है, हालांकि समाचार लिखे जाने तक किसी अधिकारी की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।





