प्रधानों की सरकार से दो टूक-समय पर चुनाव, नहीं तो कायम रखी जाये कुर्सी

मुजफ्फरनगर में पंचायत चुनाव को लेकर बढ़ी हलचल, चुनाव में देरी पर रोष जताने सड़कों पर उतरे प्रधान-प्रत्याशी

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ने और चुनाव आगे खिसकने की संभावनाओं के बीच ग्राम प्रधानों ने अब खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। जनपद मुजफ्फरनगर बुधवार को बड़ी संख्या में प्रधान, संभावित प्रत्याशी और पंचायत प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पहुंचे तथा सरकार से समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

जिला पंचायत सदस्य और ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष सतेंद्र बालियान के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट स्थित डीएम कार्यालय पर पहुंचे ग्राम प्रधानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। ऐसे में संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप समय पर चुनाव कराना सरकार की जिम्मेदारी है। प्रधानों का कहना था कि पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे अहम इकाई हैं और गांवों में सड़क, नाली, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट तथा अन्य विकास योजनाओं का संचालन पंचायतों के माध्यम से होता है। यदि चुनाव में देरी हुई तो विकास कार्य प्रभावित होंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था भी कमजोर पड़ेगी।

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कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान प्रधानों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए सरकार से जल्द चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद गांवों में विकास योजनाओं की गति धीमी पड़ सकती है। इसी बीच प्रदेश सरकार द्वारा 26 मई से ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने पर ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव समय से आगे बढ़ सकते हैं, जिसके चलते बड़ी संख्या में प्रधान अपना कार्यकाल बढ़ाने की मांग भी उठा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर लगातार चर्चाएं तेज हैं कि चुनाव प्रक्रिया में देरी होने की स्थिति में प्रशासनिक व्यवस्था के तहत पंचायतों का संचालन प्रशासकों के माध्यम से कराया जा सकता है।

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प्रधानों और संभावित उम्मीदवारों का कहना है कि यदि पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराए गए तो गांवों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी खत्म हो जाएगी और ग्रामीण जनता की समस्याओं का समाधान प्रभावित होगा। उन्होंने सरकार से जल्द स्थिति स्पष्ट करने और संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में अनावश्यक देरी से गांवों के विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

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