तीर्थनगरी शुक्रताल में अकेली मर गई बुजुर्ग मीना, बहन रेखा ने अपना लिया इस्लाम धर्म

मुजफ्फरनगर। महाभारत काल का इतिहास अपने आप में समेटने के साथ ही श्रीमद भागवत कथा की गंगोत्री माने जाने वाली तीर्थनगरी शुक्रताल में लावारिस अवस्था में रहकर आश्रम में सेवा कर गुजर बसर कर रही बुजुर्ग महिला की रविवार की सुबह अचानक ही मौत हो गई। लोगों ने महिला को बीमार होने पर शनिवार को ही निजी चिकित्सक के यहां ले जाकर उपचार दिलाया था। सवेरे महिला घर से बाहर धूप में बैठने के लिए निकली थी तो अचानक ही वो जमीन पर गिर गई और फिर नहीं उठ सकी। महिला की बहन ने इस्लाम धर्म अपनाकर निकाह कर लिया और पति के साथ दुबई में रह रही है, जिसने आने से इंकार कर दिया। बाद में पुलिस ने लावारिस अवस्था में महिला के शव को प्रधान पति को सौंप दिया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर महिला का गंगा घाट शुक्रताल पर अंतिम संस्कार कर दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 80 साल की वयोवृ( महिला मीना देवी पुत्री रामचंद्र पिछले करीब तीन दशक से शुक्रतीर्थ खादर में रह रही थी। यह महिला कभी किसी आश्रम और कभी किसी आश्रम में रहकर अपना जीवन व्यतीत कर रही थी। वर्तमान में महिला तीर्थनगरी के संत साहिब आश्रम शुक्रताल में एक दुकान नुमा कमरे में किराये पर रह रही थी और आश्रम में ही सेवा करते हुए अपना जीवन यापन कर रही थी। शुक्रताल खादर के प्रधान पति राजपाल सैनी ने बताया कि शनिवार क ो इस महिला की अचानक ही तबियत बिगड़ गई थी। संत साहिब आश्रम शुक्रताल के महात्मा दलवीर पुत्र लक्ष्मण सिंह ने उनको जानकारी दी तो वो महिला को लेकर मोरना सरकारी अस्पताल और फिर किसी निजी चिकित्सक के यहां पर लेकर गये थे। उनको दवाई दिलाई और उपचार से आराम होने के बाद रात्रि में महिला को उसके आश्रम वाले कमरे पर छोड़ दिया गया था। रविवार की सुबह महिला के निधन की जानकारी मिली। ये महिला यहां पर करीब 25 साल से अकेले ही जीवन निर्वाह कर रही थी।

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जानकारी मिलने पर प्रधान पति राजपाल सैनी भी मौके पर पहुंचे। बताया कि इस महिला के परिवार के बारे में पडौसियों को कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए आश्रम से महात्मा द्वारा पुलिस को डायल 112 पर सूचना दी गई थी। इसके बाद आई पुलिस ने यहां पर महिला के परिवार के बारे में जानकारी की तो पता चला कि मृतक मीना की एक बहन रेखा थी। जिसने असलम खान नामक युवक से निकाह कर धर्म परिवर्तन कर लिया था और वो अपने पति असलम के साथ वर्तमान में दुबई में रह रही है। पुलिस ने रेखा असलम खान का मोबाइल नम्बर प्राप्त कर उससे बात की तो उसने बहन के अंतिम संस्कार में आने से इंकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने लावारिस में मीना का पंचनामा भरने के बाद शव प्रधानपति राजपाल सैनी को सुपुर्द कर दिया। महिला की बहन रेखा असलम खान ने पुलिस को अंतिम संस्कार करने की अनुमति दे दी थी। राजपाल ने बताया कि ग्रामीणों की मदद से शुक्रताल खादर के गंगा घाट पर मृतका मीना का अंतिम संस्कार करा दिया।

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उन्होंने बताया कि मुखाग्नि शनि पुत्र मुनेश पाल निवासी शुक्रताल थाना भोपा द्वारा दी गई। राजपाल ने बताया कि उनको आज ही जानकारी मिली है कि मीना की बहन रेखा उसको दुबई से प्रत्येक माह दस हजार रुपये महीना खर्च के लिए भेजती थी। उसका कोई भी रिश्तेदार या परिवारीजन यहां पर उसके पास कभी देखा नहीं गया था। वो आश्रमों में ही रहकर अपना जीवन व्यतीत कर रही थी। बताया कि रविवार की सुबह महिला मीना अपने कमरे से निकलकर धूप में बैठी थी। इसी बीच अचानक वो जमीन पर गिर गयी और उसकी मौत हो गई। मामला हार्ट अटैक का ही लग रहा है। महिला के अंतिम संस्कार में पुलिस कर्मियों के अलावा प्रधान पति राजपाल सैन्ी, अजय कृष्ण शास्त्री, महात्मा दलवीर सिंह, शुभम पुत्र राजेंद्र कौशिक, राहुल पुत्र नरेश, राजपाल पुत्र पोखर सिंह, अजय शर्मा पुत्र सतपाल तथा चौकी प्रभारी शुक्रताल भी मौजूद रहे।  

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