India-US Trade Deal नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से बातचीत के दौर से गुजर रही ट्रेड डील आखिरकार सामने आ गई है। इस अहम समझौते की पहली आधिकारिक झलक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर देखने को मिली, जहां उन्होंने सोमवार रात एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा की। यह पोस्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई उनकी बातचीत के कुछ ही समय बाद सामने आई।
ट्रंप के ऐलान के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी और अमेरिका की ओर से टैरिफ में कटौती किए जाने की पुष्टि की। सरकार का कहना है कि यह भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा और निवेश, निर्यात व रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
हालांकि, इस डील की जानकारी सबसे पहले अमेरिका की ओर से आने पर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि इतने अहम समझौते की घोषणा भारत सरकार की बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्यों की।
कांग्रेस ने साधा निशाना
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि भारत को अपनी ही सरकार के फैसलों की जानकारी भी अमेरिका से मिल रही है। उन्होंने टिप्पणी की कि भारत-अमेरिका के बीच बातचीत की सूचना पहले अमेरिकी पक्ष की ओर से सामने आती है, जबकि भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक बयान बाद में आता है। कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इसी आधार पर सरकार की संचार रणनीति पर सवाल खड़े किए।
सरकार की सफाई, पीयूष गोयल ने दिया जवाब
विपक्ष के आरोपों का जवाब केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को दिया। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रेड डील से जुड़ी घोषणा अमेरिका की ओर से आना स्वाभाविक था।
पीयूष गोयल ने कहा कि रेसिप्रोकल टैरिफ अमेरिका द्वारा लगाए गए थे और उन्हें घटाने का फैसला भी अमेरिकी प्रशासन ने ही किया। जब टैरिफ अमेरिका को कम करने थे और इसमें 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत तक की कटौती की गई, तो इस फैसले की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा साझा किया जाना असामान्य नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस समझौते का स्वागत करता है और इससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा मिलेगी। मंत्री ने इस फैसले के लिए अमेरिकी नेतृत्व का आभार भी जताया।
सियासत बनाम अर्थव्यवस्था
जहां एक ओर विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देख रहा है, वहीं सरकार इसे भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि बता रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इस ट्रेड डील का असर भारतीय बाजार, निर्यात और उद्योगों पर किस तरह पड़ता है।






