60 फीट ऊंचा झूला। रात 11:30 बजे का वक्त। और फिर कुछ ही सेकंड में मेले की खुशी चीख-पुकार में बदल गई।
कुशीनगर मेला हादसा बुधवार देर रात खड्डा थाना क्षेत्र के भैसहा मेले में हुआ, जहां घूमते वक्त बड़ा झूला उखड़कर गिर गया। पुलिस के मुताबिक करीब 30 लोग घायल हुए हैं। इनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। 2 बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
घटना उस समय हुई, जब मेले में भारी भीड़ थी और झूला लगभग पूरा भरा हुआ था। स्थानीय लोगों के अनुसार झूले पर करीब 80 लोग बैठे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि झूला दो चक्कर तक सामान्य लगा, लेकिन उसके बाद उसमें चरमराहट सुनाई दी। लोगों ने शोर मचाया, मगर आरोप है कि ऑपरेटर ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। फिर अचानक तेज आवाज आई और पूरा ढांचा एक तरफ से उखड़कर नीचे आ गिरा।
पूरा मामला क्या है?
भैसहा मेला हर साल चैत्र पूर्णिमा के आसपास नारायणी नदी के तट पर स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर के पास लगता है। इस मेले में पूर्वांचल के अलावा बिहार और नेपाल से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस बार भी 30 मार्च से 4 दिन का मेला चल रहा था और गुरुवार इसका आखिरी दिन बताया गया। इसी वजह से बुधवार शाम से ही मेले में असामान्य भीड़ थी।
हादसा रात में उस वक्त हुआ, जब लोग झूले पर तेजी से चढ़ रहे थे और नीचे भी भारी भीड़ खड़ी थी। पुलिस के मुताबिक झूला गिरने से सिर्फ उसमें बैठे लोग ही नहीं, उसके आसपास खड़े लोग भी चपेट में आ गए। कुछ दुकानें भी इसकी चपेट में आईं। भारी ढांचा नीचे आने से कई लोग उसके नीचे दब गए। और यहीं से मामला सिर्फ एक हादसे तक सीमित नहीं रहा — यह मेला सुरक्षा पर बड़ा सवाल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि झूले में पहले ही तकनीकी संकेत दिख रहे थे। घायल लालू गुप्ता के मुताबिक, जब वे झूले पर चढ़े तभी “खट” जैसी आवाज आई थी। उनके अनुसार, उसके बाद झूला दो बार घूमा और फिर अचानक टूट गया।
हादसे के तुरंत बाद मेले में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस ने स्थानीय लोगों के साथ राहत-बचाव शुरू किया। मेले में तैनात पुलिसकर्मियों ने आसपास मौजूद लोगों की मदद से झूले के नीचे दबे लोगों को निकालना शुरू किया। झूला इतना भारी था कि रेस्क्यू में करीब एक घंटा लग गया। घायलों को बाहर निकालकर एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया।
पुलिस के मुताबिक 6 एंबुलेंस लगाई गईं और 10 से ज्यादा घायलों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। कई घायलों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। 2 बच्चों की हालत ज्यादा नाजुक बताई गई है। सवाल यह है कि जब मेला क्षेत्र में इतनी भीड़ थी, तब सुरक्षा जांच और भार क्षमता की निगरानी किसने की?
सूत्रों के मुताबिक झूले का बेस कमजोर था और उसे जमीन में ठीक से गाड़ा नहीं गया था। यही वजह बताई जा रही है कि ज्यादा भार पड़ने पर ढांचा संतुलन नहीं संभाल पाया। अगर यह बात जांच में सही निकलती है, तो यह सीधे-सीधे संचालन में गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।






