नोएडा के बाद मेरठ में भी खुला नाला बना मौत का कारण, ई-रिक्शा चालक की जान गई

मेरठ। नोएडा के सेक्टर-150 में खुले नाले के कारण इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि मेरठ से ठीक वैसी ही लापरवाही की एक और तस्वीर सामने आ गई। कैंट बोर्ड क्षेत्र में नाले पर सुरक्षा दीवार न होने के कारण शुक्रवार शाम एक ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर नाले में जा गिरा, जिसमें चालक की जान चली गई।

घटना आबूलेन इलाके में काठ के पुल के पास हुई। बारिश के बीच ढलान वाली सड़क पर फिसले ई-रिक्शा ने सीधे खुले नाले में पलटी खा ली। ई-रिक्शा के नीचे दबने और गंदे पानी में फंसने से चालक सनी (42) की मौके पर ही हालत गंभीर हो गई।

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आधे घंटे तक मदद का इंतज़ार, रेस्क्यू में देरी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद सनी करीब 30 मिनट तक नाले में दबा रहा। मौके पर भीड़ तो जमा हो गई, लेकिन तत्काल रेस्क्यू का प्रयास नहीं हो सका। पुलिस भी सूचना मिलने के काफी देर बाद पहुंची। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बचाव कार्य शुरू हो जाता, तो शायद सनी की जान बचाई जा सकती थी।

परिवार का सहारा था सनी

मृतक सनी, सदर बाजार थाना क्षेत्र के रजबन स्थित खटीक कॉलोनी का रहने वाला था। वह ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार की रोज़ी-रोटी चलाता था। शुक्रवार शाम वह बेगमपुल से सवारी छोड़कर घर लौट रहा था। हादसे के समय रिक्शे में कोई सवारी नहीं थी, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई।

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पहले भी हो चुके हैं हादसे, फिर भी नहीं बने सुरक्षा इंतज़ाम

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि काठ के पुल से रजबन की ओर जाने वाली सड़क पर तेज़ ढलान है और नाले के किनारे कोई सुरक्षा दीवार या रेलिंग नहीं है। लोगों का कहना है कि इस स्थान पर पहले भी वाहन नाले में गिर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कैंट बोर्ड की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम

पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से सनी को नाले से बाहर निकालकर प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने पोस्टमार्टम और कानूनी कार्रवाई से इनकार किया, जिसके बाद आवश्यक औपचारिकताओं के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया।

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प्रशासनिक लापरवाही पर फिर उठे सवाल

लगातार सामने आ रहे ऐसे हादसों ने एक बार फिर शहरी सुरक्षा, खुले नालों और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का कहना है कि जब तक समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए जाएंगे, तब तक ऐसे हादसे रुकना मुश्किल हैं।

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