आईआईटी रुड़की सहारनपुर कैंपस में मोल्डेड फाइबर उत्पादों पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बाजार और भविष्य की दिशा पर मंथन, कहा-कृषि अपशिष्ट-वेस्ट पेपर में छिपी भविष्य की पैकेजिंग
मुजफ्फरनगर। आईआईटी रुड़की के सहारनपुर कैंपस स्थित पेपर एंड पैकेजिंग टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में मोल्डेड फाइबर उत्पादों में नवाचार विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में उत्तर प्रदेश पेपर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं बिंदल डुप्लैक्स प्रा. लि. के प्रबंध निदेशक पंकज अग्रवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। पंकज अग्रवाल ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मोल्डेड फाइबर उत्पादों की नवीन तकनीकों और उनके व्यावसायिक व पर्यावरणीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पारंपरिक प्लास्टिक पैकेजिंग के विकल्प के रूप में मोल्डेड फाइबर उत्पाद भविष्य की आवश्यकता बनते जा रहे हैं। जर्मनी सहित विश्व के अनेक देशों और भारत के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों के साथ उन्होंने इस उद्योग में हो रहे नवाचारों और संभावनाओं को साझा किया।

मुख्य अतिथि पंकज अग्रवाल ने कहा कि मोल्डेड फाइबर उत्पाद आज केवल एक वैकल्पिक पैकेजिंग नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर उभरता हुआ एक संपूर्ण उद्योग बन चुके हैं। इसने पर्यावरणीय संकट, प्लास्टिक प्रदूषण और सस्टेनेबिलिटी की बढ़ती मांग ने इस क्षेत्र को नई पहचान दी है। मोल्डेड फाइबर उत्पादों की सबसे बड़ी भूमिका सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विकल्प के रूप में सामने आई है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड पैकेजिंग, ई-कॉमर्स और औद्योगिक पैकेजिंग के साथ ही डिस्पोजल क्रॉकरी में इन उत्पादों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ये उत्पाद बायोडिग्रेडेबल, रीसायक्लेबल और कार्बन फुटप्रिंट कम करने वाले हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वैश्विक मानकों की पूर्ति भी संभव हो रही है।
उन्होंने बताया कि विकसित देशों के साथ-साथ भारत जैसे विकासशील देश भी अब ग्रीन पैकेजिंग को अपनाने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहे हैं, जिसमें मोल्डेड फाइबर एक मजबूत आधार प्रदान करता है। उन्होंने मोल्डेड फाइबर उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कच्चे माल के रूप में वेस्ट पेपर, कृषि अपशिष्ट, गेहूं का भूसा, गन्ने की खोई और रीसायकल फाइबर का उपयोग किया जाता है। आधुनिक तकनीकों के माध्यम से इन कच्चे माल को लुगदी में परिवर्तित कर उच्च गुणवत्ता के पैकेजिंग उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

उन्होंने आईआईटी रुड़की के इनोपेप लैब में विकसित हो रही ऑटोक्लेव डाइजेस्टर जैसी उन्नत तकनीकों की सराहना करते हुए कहा कि अनुसंधान और उद्योग के सहयोग से उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और लागतकृतीनों में सुधार संभव है। यही नवाचार इस उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाएगा। पंकज अग्रवाल ने कहा कि मोल्डेड फाइबर उत्पादों का बाजार देश और विदेश दोनों स्तरों पर तेज़ी से विस्तार कर रहा है। ई-कॉमर्स कंपनियां, बहुराष्ट्रीय ब्रांड और निर्यातक संस्थान अब प्लास्टिक के स्थान पर टिकाऊ पैकेजिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में मोल्डेड फाइबर पैकेजिंग का वैश्विक बाजार अरबों डॉलर का होगा, जिसमें भारत की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सरकारी नीतियां, प्लास्टिक प्रतिबंध और कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य इस उद्योग के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की तकनीकें न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि पराली जलाने जैसी गंभीर समस्या के समाधान में भी अहम भूमिका निभा सकती हैं। साथ ही, कृषि अपशिष्ट के उपयोग से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उपस्थित विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे टिकाऊ पैकेजिंग की दिशा में एक मील का पत्थर बताया। संगोष्ठी के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि उद्योग, शैक्षणिक संस्थान और वैश्विक कंपनियों के सहयोग से पर्यावरण अनुकूल समाधान विकसित कर भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सकता है।






