पालिका हड़तालः हर रोज तीन लाख का नुकसान, ईओ ने दी अंतिम चेतावनी

मुजफ्फरनगर नगर पालिका में हड़ताल से जनसेवाएं ठप होने पर सख्त नजर आई ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह

वेतन भुगतान को लेकर शुरू हुई हड़ताल को पुलिस प्रशासन के सहयोग से खुलवाने की कही बात, जनहित प्रभावित होने पर होगी कार्यवाही

मुजफ्फरनगर। नगर पालिका परिषद में कार्यरत लिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों द्वारा वेतन भुगतान पर रोक के मुद्दे पर शुरू किया गया कार्य बहिष्कार अब गंभीर मोड़ ले चुका है। नगरपालिका प्रशासन ने हड़ताल को अनुचित करार देते हुए आवश्यक सेवाओं के बाधित होने पर विधिक कार्यवाही की चेतावनी दी है।

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हड़ताल के चलते गृहकर संग्रहण, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने जैसी सेवाएं इत्यादि पूरी तरह से ठप हो गई हैं। इस हड़ताल के कारण पालिका को करीब तीन लाख रुपये प्रतिदिन के राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। ऐसे में ईओ ने हड़ताल खत्म कर काम पर नहीं लौटने पर कानूनी कार्यवाही करने और पुलिस-प्रशासन के सहयोग से आंदोलन खत्म कराने की अंतिम चेतावनी दी है।
पालिका को हो रही राजस्व क्षति पर टीएस से मांगी रिपोर्ट
नगर पालिका परिषद, मुजफ्फरनगर के कर्मचारियों द्वारा 16 सितंबर से जारी कार्य बहिष्कार को लेकर नगर प्रशासन और कर्मचारी संगठन के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। स्वायत्त शासन कर्मचारी संगठन उत्तर प्रदेश, शाखा मुजफ्फरनगर के बैनर तले पालिका में कर्मचारियों की चल रही हड़ताल से नगर पालिका के सभी विभागों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। ऐसे में पालिका प्रशासन ने कर्मचारियों की इस हड़ताल को अनुचित और गैर कानूनी करार दिया है। वहीं हड़ताल के कारण जलकल और गृहकर के कैश काउंटर भी बंद करा दिये जाने के कारण पालिका को प्रतिदिन करीब तीन लाख रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है।

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ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि कार्यवाहक टीएस पारूल यादव से राजस्व क्षति को लेकर भी रिपोर्ट मांगी गई है, मौखिक तौर पर बताया गया है कि प्रतिदिन पालिका के दोनों जलकर और गृहकर के कैश काउंटर पर ढाई से तीन लाख रुपये का टैक्स जमा होता है, जो हड़ताल के कारण नहीं हो पा रहा है। ईओ ने उनको वैकल्पिक व्यवस्था कर काउंटर खुलवाने के निर्देश दिये हैं।
वेतन देने पर मौखिक सहमति बनने के बाद हड़ताल की गई
पालिका की अधिशासी अधिकारी डॉ. प्रज्ञा सिंह ने स्वायत्त शासन कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों एवं समस्त कर्मचारियों के लिए एक चेतावनी पत्र जारी किया है। पत्र के अनुसार, कर्मचारियों के अगस्त माह का वेतन 9 सितंबर को खातों में भेज दिया गया था। जिन कर्मचारियों का वेतन विशेष कारणों से रोका गया था, उनके संबंध में संगठन से प्राप्त हुए पत्र को लेकर वेतन आहरण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई थी। बावजूद इसके, संगठन द्वारा केवल तीन दिन का नोटिस देकर 16 सितंबर को अचानक हड़ताल कर दी गई।

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ईओ डॉ. प्रज्ञा का कहना है कि संगठन के प्रतिनिधियों से पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी की बैठक में पहले ही वेतन भुगतान को लेकर मौखिक सहमति बन गई थी, ऐसे में हड़ताल करना अनुचित नहीं है। ईओ ने कहा कि संगठन द्वारा जानबूझकर हड़ताल का नोटिस ऐसे समय पर दिया गया जब दो दिन सार्वजनिक अवकाश था, और केवल एक कार्य दिवस में ही कार्यालय बंद कर कार्य बहिष्कार कर दिया गया।
सीसीटीवी फुटेज बना साक्ष्य, संगठन ने कर्मियों को डराया और धमकाया
ईओ डॉ. प्रज्ञा के अनुसार कर्मचारियों द्वारा न केवल स्वयं कार्य बहिष्कार किया गया, बल्कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को भी काम करने से रोका गया। यहां तक कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र काउंटर और कैश काउंटर को भी जबरन बंद करा दिया गया, जिससे आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। सीसीटीवी फुटेज और अन्य कर्मचारियों की शिकायतों के आधार पर यह भी कहा गया है कि जो कर्मचारी काम करना चाहते थे, उन्हें संगठन द्वारा डराया-धमकाया गया। इसके अलावा, हड़ताल शुरू होने के अगले ही दिन संगठन ने अपने ज्ञापन में पांच नई मांगे जोड़कर आंदोलन को और जटिल बना दिया। अधिशासी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यदि संगठन ने हड़ताल वापस नहीं ली, तो पालिका प्रशासन को पुलिस और प्रशासनिक सहयोग से विधिक व अनुशासनात्मक कार्यवाही करनी पड़ेगी। इसके तहत हड़ताल में शामिल समस्त कर्मचारियों के विरुद्ध आवश्यक सेवा अधिनियम और अन्य प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
तीन दिन पालिकाध्यक्ष बाहर, लेखा विभाग बंद, वेतन नहीं मिलेगा
हडताल पर बैठे कर्मचारियों में अधिष्ठान लिपिक, लेखा लिपिक भी शामिल हैं जिनके हडताल पर रहते हुए वेतन बनाया जाना एवं वेतन आहरण किया जाना सम्भव ही नही है साथ ही आप यह भी भली भांति अवगत है कि अध्यक्ष नगर पालिका परिषद, मुजफ्फरनगर तीन दिवस हेतु जनपद से बाहर हैं जिनके हस्ताक्षर के बिना वेतन आहरण सम्भव नहीं हो सकेगा फिर भी आप लोगों द्वारा हठधर्मिता पूर्वक हडताल जारी रखी गयी है। हड़ताल के चलते नगरवासियों को विभिन्न प्रमाण पत्रों, गृहकर भुगतान, जल आपूर्ति से जुड़ी सेवाओं और अन्य कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नगरपालिका परिसर में आने वाले नागरिकों को संगठन के लोगों द्वारा बाहर से ही लौटा दिया जा रहा है। नगर निवासी रोहित शर्मा ने कहा कि तीन दिनों से जन्म प्रमाण पत्र के लिए आ रहा हूं, पर हर बार यही जवाब मिलता है कि हड़ताल है, काम नहीं होगा।

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