पालिका हड़तालः कर्मचारियों के धरने पर अध्यक्ष से भिड़ गई महावीरी

महिला अनुचर ने टाउनहाल के धरने पर पहुंचकर किया हंगामा, कहा-मेरी पीड़ा में नहीं दिया साथ, अपना नम्बर आया तो बिछा ली दरी

मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् में वेतन विवाद को लेकर हड़ताल शुरू तो हो गई, लेकिन कर्मचारियों में ही इस हड़ताल को लेकर आपसी टकराव और नाराजगी बनी दिखाई दे रही है। हड़ताल के दूसरे दिन धरने पर जब स्वायत्त शासन कर्मचारी संगठन के शाखा अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी कर्मचारियों के साथ ईओ के खिलाफ मोर्चाबंदी किये हुए थे, तभी महिला अनुचर ने वहां पहुंचकर बड़ा हंगामा कर दिया और अध्यक्ष के साथ महिला कर्मी की जमकर तकरार हुई।

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नगरपालिका में वेतन विवाद को लेकर संगठन के आह्नान पर कर्मचारी दो दिनों से हड़ताल पर हैं। काम बंद है और सारी व्यवस्था कर्मचारियों की एकजुटता के कारण चौपट हो गई हैं। बुधवार को हड़ताल के दूसरे दिन भी संगठन के अध्यक्ष ब्रजमोहन और महामंत्री सुनील वर्मा के नेतृत्व में कर्मचारी धरने पर नजर आये। कार्य का पूरी तरह से बहिष्कार किया गया। धरना चल रहा था और ईओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कर्मचारी गुस्सा जता रहे थे, इसी बीच नगरपालिका में लेखा विभाग में अनुचर के पद पर कार्यरत महिला कर्मचारी महावीरी भी धरने पर पहुंचे और सीधे बरस पड़ी। महावीरी की संगठन के अध्यक्ष के साथ तीखी बहस हुई, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ। इसमें बुजुर्ग और महिला कर्मचारी होने के बावजूद भी धरने पर अध्यक्ष द्वारा तीखी बहस के साथ दुत्कारा भी गया।

दरअसल, महिला अनुचर महावीरी को संगठन और दूसरे कर्मचारियों पर इसलिए गुस्सा था कि पीड़ा के समय ना तो संगठन ने उसके लिए आवाज उठाई और ना ही दूसर्र कर्मचारियों ने उसका साथ दिया। पिछले दिनों महावीरी की पुत्रवधु की मौत हो गई थी। सरकारी क्वार्टर में ही उसने सुसाइड कर लिया था। इसके कारण परिवार पर संकट आया।

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महावीरी का कहना है कि किसी भी कर्मचारी के परिवार में मौत होने पर संगठन शोकसभा करता है, अवकाश भी किया जाता है, लेकिन उसके लिए ऐसी कोई भी संवेदना नहीं दिखाई गई। अब जब अपनी पूंछ पर दबाव पड़ा तो सारे एक हो गये। महावीरी ने सभी को आईना दिखाया और खूब भड़की। दूसरे कर्मचारियों ने बीच बचाव कराकर महावीरी को वहां से रवाना किया।
ईओ बोली-नियमों के विपरीत दिया नोटिस, विचार से पहले ही करा दी हड़ताल
मुजफ्फरनगर नगरपालिका में हड़ताल को लेकर ईओ डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बुधवार को कहा कि संगठन ने वेतन रोकने को लेकर जो भी पत्र दिया, वो नियमानुसार सही प्रक्रिया अपनाये बिना ही दिया गया। नियमों के अनुसार किसी भी प्रकरण में विवाद की स्थिति होने पर 15 दिन के नोटिस पर मांग पत्र दिया जाता है। इसके लिए उठाई गई मांगों पर विचार किया जाता है, तत्काल मांग पूरी करने की कोई व्यवस्था नहीं है। 12 सितम्बर को स्वायत्त शासन कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष व महामंत्री ने वेतन रोकने के सम्बंध में पत्र डाक में दिया। अगले दिन 13 व 14 सितम्बर की छुट्टी रही। 15 सितम्बर सोमवार को उनको पत्र मिला, जिस पर निस्तारण के लिए मार्क कर लेखाकार को पत्र भेज दिया गया। 16 सितम्बर से संगठन ने हड़ताल कर दी।

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जबकि खुद संगठन द्वारा दिये गये पत्र में अध्यक्ष और महामंत्री ने उल्लेख किया है कि पालिकाध्यक्ष और ईओ से वार्ता के दौरान वेतन जारी करने का आश्वासन दिया गया। इस पर सकारात्मक दृष्टिकोण से विचार करने का अवसर दिये बिना ही आनन फानन में हड़ताल कर दी गई, जो एक सुनियोजित साजिश को दर्शाता है। इसके बाद संगठन ने अपना मांग पत्र बदल लिया और वेतन की मांग के साथ ही चार दूसरी मांगों को भी उसमें जोड़ दिया, जिसकी जानकारी मीडिया के माध्यम से ही उनको मिली है।

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