मुजफ्फरनगर-सात करोड़ लेकर नहीं दी जमीन, दो साल से भटक रही महिला उद्यमी

130 बीघा भूमि खरीदकर मुजफ्फरनगर में औद्योगिक पार्क स्थापित करने की थी योजना, भूस्वामियों और प्रॉपर्टी डीलरों पर धोखाधड़ी का आरोप

मुजफ्फरनगर। जिले में औद्योगिक पार्क स्थापित कर पांच हजार लोगों को रोजगार देने का सपना लेकर आई रुड़की की महिला उद्यमी अभिलाषा सिंह खुद को करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी का शिकार बता रही हैं। उनका आरोप है कि जमीन खरीदने के नाम पर करीब सात करोड़ रुपये लेने के बावजूद न तो कंपनी के नाम भूमि की रजिस्ट्री कराई गई और न ही रकम वापस की गई। करीब दो साल से जमीन और अपनी रकम वापस पाने के लिए भटक रही महिला उद्यमी ने प्रेसवार्ता कर अपनी आपबीती सुनाई। उनका कहना है कि मुजफ्फरनगर में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, जिसके बाद उन्हें उत्तराखंड के मंगलौर थाने में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कराना पड़ा।

सोमवार को शहर के एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में एप्रो ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक अभिलाषा सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी एप्रो ग्लोबल लिमिटेड की सहायक कंपनी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की औद्योगिक विकास नीति से प्रेरित होकर कंपनी ने मुजफ्फरनगर के छपार थाना क्षेत्र के मौजा मांडला में बड़े स्तर पर औद्योगिक पार्क स्थापित करने की योजना बनाई थी। इस परियोजना के माध्यम से स्थानीय क्षेत्र के कम से कम पांच हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने और प्रदेश के औद्योगिक विकास में योगदान देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

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अभिलाषा सिंह के अनुसार, औद्योगिक परियोजना के लिए जमीन की तलाश के दौरान जितेंद्र वर्मा और मुशीर आलम ने कंपनी को भूमि उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया था। वर्ष 2024 में करीब 130 बीघा जमीन खरीदने के लिए नोटरी अनुबंध किया गया। जमीन का सौदा 7.25 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से तय हुआ था। आरोप है कि जमीन की खरीद, कंपनी के नाम बैनामा कराने और भूमि का भराव कराने का आश्वासन देकर अलग-अलग व्यक्तियों और उनके परिजनों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये स्थानांतरित कराए गए। महिला उद्यमी का आरोप है कि रकम प्राप्त करने के बाद भी संबंधित लोगों ने कंपनी के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई। कई बार तकादा करने और रकम वापस मांगने पर भी कोई समाधान नहीं निकला। आरोप है कि करीब एक माह पहले संबंधित लोगों ने जमीन देने के लिए नई शर्त रख दी और कहा कि अब भूमि चाहिए तो 18 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से भुगतान करना होगा। इससे कंपनी की परियोजना अधर में लटक गई।

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अभिलाषा सिंह ने मुशीर आलम, जितेंद्र वर्मा, महकार सिंह, कटार सिंह, अजय, विजय, कुलवीर सिंह, विकास कुमार, बालकराम, बालेश, मामचंद, सिद्धगोपाल शर्मा, तिलकराम, जसवीर, बिजेंद्र, अमरेश और राजकुमार सहित कई लोगों पर सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी कर करोड़ों रुपये हड़पने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब उन्होंने रकम वापस करने या जमीन का बैनामा कराने की मांग की तो उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गईं। महिला उद्यमी ने बताया कि न्याय पाने के लिए उन्होंने मुजफ्फरनगर के एक मंत्री से मुलाकात करने के साथ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी शिकायत दी। छपार थाने के कई चक्कर लगाए, लेकिन उनके अनुसार आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। करीब एक साल तक अधिकारियों के यहां शिकायत लेकर भटकने के बाद उन्होंने उत्तराखंड के मंगलौर थाने में शिकायत दी, जहां आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। फिलहाल वहां की पुलिस मामले की जांच कर रही है। अभिलाषा सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में मुजफ्फरनगर में औद्योगिक निवेश और कारोबारियों की सुरक्षा का बेहतर माहौल मिलेगा, लेकिन उनके अनुभव ने उन्हें निराश किया है। उनका आरोप है कि जिले में धोखाधड़ी करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए भी पीड़ितों को लंबी मशक्कत करनी पड़ रही है। प्रेसवार्ता में कंपनी से जुड़े अतुल सेठ, सुधाकर और राहुल कुमार भी मौजूद रहे।

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