नई दिल्लीः केरल हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है कि इस्लाम में बहु विवाह (एक से अधिक विवाह) को केवल उसी स्थिति में इजाजत है, जब पुरुष अपनी सभी पत्नियों के साथ समान न्याय कर सके। केरल हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी एक रिविजन ( पुनरीक्षण) याचिका का निपटारा करते हुए की। यह याचिका फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें एक पत्नी द्वारा अपने पति से 10,000 मासिक भरण-पोषण की मांग को खारिज कर दिया गया था। पति नेत्रहीन है और भीख तथा पड़ोसियों की सहायता पर निर्भर रहता है। याचिकाकर्ता पत्नी का आरोप था कि उसका पति, पहले से दो शादियां होने के बावजूद, तीसरी शादी करने की धमकी दे रहा है। अदालत ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बहु विवाह की अनुमति केवल इस शर्त पर देता है कि पति कई पत्नियों का भरण-पोषण कर सके लेकिन आर्थिक अक्षमता ऐसी शादियों को अमान्य बना देती है। कुरान (सूरा 4, आयत 3 और 129) का हवाला देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि इस्लामी कानून की मूल भावना एक पत्नी प्रथा (मोनोगैमी) है, और बहु विवाह केवल अपवाद है, वह भी तभी इजाजत है जब न्याय और क्षमता मौजूद हो। अदालत ने कहा कि इन आयतों की भावना और मंशा एक पत्नी प्रथा है। बहु विवाह केवल अपवाद है। कुरान ‘न्याय’ पर विशेष बल देता है। यदि कोई मुस्लिम पुरुष अपनी पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी पत्नी के साथ न्याय कर सके, तभी उसे एक से अधिक विवाह की अनुमति है।

एम.जी. पब्लिक स्कूल में फ्री आई कैम्प में 118 रोगियों का उपचार
शिविर में रोगियों को दवाईयों का निःशुल्क वितरण, 36 मोतियाबिंद के मरीजों का होगा फ्री ऑपरेशन मुजफ्फरनगर। एमजी. पब्लिक स्कूल परिसर में रविवार 26, अपै्रल 2026 को निःशुल्क मासिक नेत्र रोग चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ एम.जी. चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष सतीश चंद गोयल ने किया। इस अवसर पर एम.जी. पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के उपाध्यक्ष विनीत सिंघल एवं अन्य अतिथि भी मौजूद रहे। प्रधानाचार्या श्रीमती मोनिका गर्ग द्वारा अतिथियों, चिकित्सक एवं चिकित्सा कर्मियों और उपचार परामर्श लेने आये नेत्र रोगियों का विद्यालय प्रांगण में स्वागत किया गया। प्रधानाचार्या श्रीमती मोनिका गर्ग ने बताया कि प्रत्येक माह के चौथे रविवार को वरदान धर्मार्थ नेत्र चिकित्सालय, प्रेमपुरी





