मुजफ्फरनगर-पंचायत चुनाव की रंजिश में सात दोषियों को उम्रकैद की सजा

धीराहेड़ी में युवकों को घर में बंधक बनाने के बाद छुड़ाने पहुंचे लोगों पर हुई थी गोलीबारी, घायल रविंद्र ने रास्ते में तोड़ दिया था दम
अदालत ने 26 साल बाद सुनाया फैसला, एक-एक लाख रुपये का जुर्माना, दो आरोपित दोषमुक्त, एक की मुकदमे के दौरान मौत

मुजफ्फरनगर। भोपा थाना क्षेत्र के गांव धीराहेड़ी में पंचायत चुनाव की रंजिश में 26 साल पहले हुई हत्या और जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने कुल नौ आरोपियों में से सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-1 की न्यायाधीश ज्योत्सना सिवाच ने सुनाया। मामले में दो आरोपितों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त किया गया, जबकि एक आरोपित की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी।

डीजीसी राजीव शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला भोपा थाना क्षेत्र के मुकदमा अपराध संख्या 206/2000 से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 302, 307, 342, 504 तथा 149 के तहत कार्रवाई की गई थी। मामला थाना भोपा, जिला मुजफ्फरनगर से संबंधित था। अभियोजन की कहानी के अनुसार गांव धीराहेड़ी में वर्ष 2000 में प्रधान पद के चुनाव को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। वेदपाल की पत्नी हरवीरी और महमूदपुर माजरा निवासी बसंत की पत्नी ने चुनाव लड़ा था। चुनाव में हरवीरी को हार का सामना करना पड़ा था। अभियोजन के मुताबिक हरवीरी को चुनाव में समर्थन देने को लेकर बसंत पक्ष की जसवीर सिंह से रंजिश थी।

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20 सितंबर 2000 को हरवीरी पक्ष के जसवीर सिंह ने थाना भोपा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया कि उनका भतीजा जयविंद्र, गांव के रूपक और गौतम के साथ जनता इंटर कॉलेज भोपा से छुट्टी के बाद घर लौट रहा था। जब तीनों धीराहेड़ी में धूम सिंह के मकान के सामने पहुंचे तो वहां मौजूद बसंत पक्ष के लोगों ने रूपक और गौतम को पकड़ लिया। दोनों को पीटकर धूम सिंह के मकान के अंदर ले जाया गया। जयविंद्र ने घटना की जानकारी परिजनों को दी। इसके बाद धर्मवीर, सत्यपाल, संजीव, सुरेंद्र, लोटन सिंह, विनोद, रविंद्र और धर्मपाल सहित अन्य लोग दोनों युवकों को छुड़ाने के लिए वहां पहुंचे। अभियोजन के अनुसार इसी दौरान आरोपित पक्ष की ओर से गोलीबारी की गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए।

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घटना के बाद घायलों को जिला अस्पताल मुजफ्फरनगर ले जाया गया। रविंद्र और सत्यपाल की हालत गंभीर होने पर उन्हें मेरठ के लिए भेजा गया। न्यायालय में प्रस्तुत चिकित्सकीय साक्ष्य के अनुसार रविंद्र को गोली लगने से गंभीर चोट आई थी। मेरठ ले जाते समय रास्ते में रविंद्र की मृत्यु हो गई। इसके बाद पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया। मामले में अभियोजन की ओर से प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के साथ चिकित्सकीय साक्ष्य, मृत्यु परीक्षण रिपोर्ट, पुलिस अभिलेख तथा अन्य दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के सामने रखे गए।

मामले में धूम सिंह, उसके पुत्र गुलवीर और ओमवीर के अलावा अनिल, रविंद्र, नवाब, संजीव, पंकज, प्रीतम तथा महमूदपुर माजरा निवासी बसंत को आरोपित बनाया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान धूम सिंह की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई। न्यायालय ने साक्ष्यों के परीक्षण के बाद बसंत, अनिल, रविंद्र, नवाब, संजीव, पंकज और प्रीतम को दोषी ठहराया। वहीं धूम सिंह के पुत्र गुलवीर और ओमवीर को दोषमुक्त कर दिया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने कई प्रत्यक्षदर्शी और औपचारिक गवाह प्रस्तुत किए। न्यायालय के अभिलेख में चिकित्सक राजेश कुमार सहित अन्य चिकित्सकीय गवाहों के बयान दर्ज हैं। मृतक रविंद्र के मृत्यु परीक्षण और घायलों की चिकित्सकीय जांच संबंधी अभिलेख भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए।

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बचाव पक्ष की ओर से आरोपों से इनकार करते हुए घटना को गांव की चुनावी रंजिश से जुड़ा झूठा मुकदमा बताया गया था। न्यायालय ने उपलब्ध मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद सात आरोपितों को दोषी माना। 20 सितंबर 2000 को हुई घटना के करीब 26 वर्ष बाद मामले में दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अदालत ने सातों दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस प्रकार लंबे समय से चल रहे इस मुकदमे का निर्णायक चरण पूरा हुआ। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार जावला तथा अधिवक्ता अनोद बालियान ने पैरवी की।

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