आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का देवलोक गमन, जैन समाज में छाया शोक

मुजफ्फरनगर। संत शिरोमणि जैन आचार्य श्री विद्यासागर जी का देवलोकगमन हो गया. डोंगरगढ़ के चन्द्रगिरि तीर्थ में 3 दिन उपवास के बाद शरीर त्याग दिया. देर रात 2:35 बजे आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपना शरीर त्याग दिया. पूर्ण जागृतावस्था में उन्होंने आचार्य पद का त्याग करते हुए 3 दिन का उपवास लिया था और अखंड मौन धारण कर लिया था, जिसके बाद उन्होंने प्राण त्याग दिए।

आचार्य श्री के शरीर त्यागने की खबर से सकल जैन समाज में शोक की लहर है। जैन समाज के लोगों का छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ के चन्द्रगिरि तीर्थ पर जुटना शुरू हुआ। आज दोपहर 1 बजे होगी आचार्य श्री की अंतिम संस्कार विधि होगी। पिछले साल आचार्य श्री से मिलने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे थे। 77 साल की उम्र में देर रात 2:30 बजे समतापूर्वक समाधि ली. 3 दिन पहले जैन परंपरानुसार समाधि मरण की प्रक्रिया शुरू की थी। अन्न जल का त्याग कर अखंड मौन व्रत भी धारण कर लिया था। आचार्य विद्यासागर महाराज का कर्नाटक के सदलगा गांव में 10 अक्टूबर 1946 को शरद पूर्णिमा दिन के जन्म हुआ था. आचार्य विद्यासागर महाराज को जैन समाज में वर्तमान के वर्धमान कहा जाता था। आचार्यश्री के देहत्याग की खबर मिलते ही चन्द्रागिरि तीर्थ पर लोगों का जुटना शुरू हो गया।

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आचार्य श्री के निधन पर देश भर के प्रमुख राजनेताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल ने भी शोक जताया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि जन जन के आराधक, महान तपस्वी जैन संत शिरोमणि, परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का चन्द्रगिरी तीर्थ डोंगरगढ़ में संलेखना पूर्वक देवलोकगमन हो जाना पूरे विश्व के लिए अपूरणीय क्षति है। आचार्य श्री के चरणों में शत शत नमन करते हुए उन्होंने प्रार्थना की है कि उनका आशीर्वाद सदैव हमारे साथ रहेगा। दैनिक नयन जागृति परिवार भी पूर्ण श्रद्धा भाव के साथ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के चरणों में नमन करता है।

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