सरकार के 11 साल ओर किसानों के 11 सवाल पर होगा चिंतन शिविरः राकेश टिकैत

मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन ने हरिद्वार की लाल कोठी पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर की पूरी तैयारी कर ली है। हरिद्वार पहुंचकर राकेश टिकैत ने भाकियू के इस कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया और व्यवस्थाओं को लेकर संगठन के पदाधिकारियों, पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के साथ चर्चा की। उन्होंने कहा कि 16 जून को राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ होगा और 18 जून को महापंचायत तथा गंगा स्नान के साथ इसका समापन किया जायेगा। इस दिन किसानों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा जायेगा। कहा कि यह चिंतन शिविर केन्द्र सरकार के 11 साल और किसानों के 11 सवाल के मुख्य केन्द्र बिन्दु पर आयोजित किया जा रहा है।


भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने हरिद्वार लाल कोठी पर राष्ट्रीय चिंतन शिविर की तैयारियों को परखने के लिए कार्यक्रम स्थल का दौरा करते हुए ठहरने, पार्किंग, भोजन-भण्डारे की व्यवस्था पर टीम को निर्देशित किया। बताया कि किसानों के मुदृदों को लेकर चर्चा की जायेगी। बारिश का मौसम देखते हुए पंडला वाटर पु्रफ बनाया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड या उत्तर प्रदेश के किसानों के मुद्दे हो या देश के आदिवासी, किसानों, मजदूरों के प्रकरण हों, सभी पर तीन दिनों की पंचायत में चर्चा की जायेगी। उन्होंने किसानों से अनुशासन के साथ पहुंचने और गंगा स्नान करने के साथ ही एकजुट होकर आंदोलन करने का आह्नान किया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के 11 साल और किसानों के 11 सवाल पर ही यह चिंतन शिविर आयोजित होने जा रहा है। हम सरकार से किसानों के हितों के लिए, बेरोजगारी के लिए और मजदूरों व आदिवासियों के कल्याण के लिए सीधे सवाल करने जा रहे हैं।

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मध्य प्रदेश के किसानों के लिए कृषि मंत्री को लिखा पत्र

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूँग की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की व्यवस्था को लेकर केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर किसानों की समस्याओं को उठाया है।

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अपने पत्र में राकेश टिकैत ने कहा कि केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह प्रदेश मध्य प्रदेश का किसान ही परेशान है। मध्य प्रदेश का किसान ग्रीष्मकालीन मूँग की खरीद को लेकर विगत एक माह से भी अधिक समय से आन्दोलन कर रहा है, लेकिन केन्द्र हो या प्रदेश की सरकार इस विषय को लेकर गम्भीर नहीं है। उन्होंने पत्र में कहा कि सरकार ने मूँग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपये प्रति कुन्तल तय किया हुआ है, लेकिन खुला बाजार हो या मंडी किसान को 3000 रुपये से 3500 रुपये तक प्रति कुन्तल के घाटे से फसल बेचनी पड़ रही है।

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इस कारण पहले से घाटे की खेती कर रहा किसान और ज्यादा घाटे में चला जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पहले किसानों को मूँग की बुआई के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, लेकिन जब यह फसल तैयार हो जाती है फिर इसे सरकारी केन्द्रों पर खरीदा नहीं जाता। यह किसानों के साथ में सरकार की मानसिकता का दोहरा रवैया है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि किसानों के इस विषय की गम्भीरता को समझते हुए मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूँग को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का कार्य सरकार के द्वारा किया जाए, जिससे किसानों को लाभ मिल सके।

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