मीरापुर उपचुनाव-ककरौली की वोटिंग पर दिखा थानेदार की पिस्टल का असर

मुजफ्फरनगर। मीरापुर विधानसभा सीट पर बीते बुधवार को हुए मतदान के दिन मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में पुलिस फोर्स की सख्ती और ककरौली में झड़प के बाद हुए बवाल के कारण मुस्लिम बूथों का वोट प्रतिशत कई स्थानों पर कम रहा। सियासी स्तर पर विपक्ष इसका कारण सत्ता के इशारे पर पुलिस फोर्स के द्वारा एक पक्षीय सख्ती करने को बताते हुए पुनः निर्वाचन कराये जाने की मांग कर रहे हैं, तो वहीं पुलिस प्रशासन निष्पक्ष व्यवस्था का दावा कर रहा है। बूथ वार आंकड़ों पर नजर दौड़ाये तो बवाल के कारण देश भर में सुर्खियों में आए ककरौली और सीकरी गांवों में कम वोटिंग हुई। मीरापुर सीट पर सर्वाधिक मतदान गांव जीवनपुरी के वोटरों ने दिखाया। इस गांव के एक अकेले मतदान बूथ पर 91.92 प्रतिशत वोटरों ने अपने वोट डाले तो किशनपुर गांव के बूथ संख्या 93 पर वोटरों को जोश सुस्त रहा। यहां केवल 29.11 प्रतिशत ही वोटिंग हुई। 60 बूथों पर 50 प्रतिशत से ज्यादा तो 15 बूथों पर 40 प्रतिशत से भी कम वोटिंग होने के कारण यहां पर जीत और हार को लेकर अब वोटों के छोटे दलों में बंटवारे के आधार पर ही परिणाम सामने आयेगा। अभी तक मुस्लिम क्षेत्रों में कम वोटिंग के आधार पर यहां भाजपा-रालोद गठबंधन की जीत की संभावना का दावा और प्रबल माना जा रहा है, लेकिन परिणाम चौंकाने वाले भी हो सकते हैं।

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मीरापुर उपचुनाव इन दिनों ककरौली में थानेदार द्वारा महिलाओं पर पिस्टल तानने के वायरल वीडियो पर राजनीतिक गरमाहट के बीच घिर गया है। इस बवाल के बाद क्षेत्र में अनेक गांवों के पालिंग बूथों पर वोट नहीं डालने दिये जाने की शिकायतों का असर भी मतदान प्रतिशत पर साफ नजर आ रहा है। मीरापुर सीट पर कुल 57.10 प्रतिशत वोटिंग हुई। यहां पंजीक 324571 मतदाताओं में से बुधवार को मतदान के दिन 185322 वोटरों ने अपने वोट डाले हैं। इनमें 171912 पुरुषों में से 101136, 152644 महिला वोटरों में से 85284 और 15 अन्य मतदाताओं में से 02 ने अपने अपने वोट डाले हैं। सर्वाधिक 91.92 प्रतिशत मतदान गांव जीवनपुरी के बूथ संख्या 284 जूनियर हाईस्कूल में डाले गये। गांव में यह अकेला ही बूथ हैं, यहां पंजीकृत 668 वोटरों में से 614 ने वोट डाले, जिनमें 326 पुरुष और 288 महिला वोटर शामिल हैं। जबकि सबसे कम वोटिंग किशनपुर के बूथ संख्या 93 पर हुई। यहां पंजीकृत 1223 वोटरों में से 356 वोट पड़े, इनमें 219 पुरुष और 137 महिला वोटरों ने अपने वोट डाले। किशनपुर के दूसरे पोलिंग बूथ संख्या 92 पर भी कुल 34.98 प्रतिशत मतदान ही हुआ। मीरापुर उप चुनाव में कुल 328 पोलिंग बूथों में से 60 बूथ ऐसे रहे हैं, जिनमें 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ है। जबकि 31 बूथों पर 70 प्रतिशत से ज्यादा वोट पड़े हैं। 14 बूथों पर 30 से 40 प्रतिशत के बीच मतदान हुआ है। 6 बूथ ऐसे हैं, जिनमें 80 प्रतिशत से ज्यादा वोट डाले गये। जबकि एक बूथ पर 30 प्रतिशत से भी कम मतदान हुआ है।

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गांव सीकरी भी मतदान के दौरान विवादों में आया लोगों ने बड़े पैमाने पर पुलिस पर वोट न डालने देने के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया, सपा व बसपा प्रत्याशियों की शिकायत पर खुद डीएम को गांव में पहुंचकर बूथों का जायजा लेने के लिए विवश होना पड़ा था। यहां बने सात पोलिंग बूथों में से छह बूथों पर मतदान प्रतिशत 50 से भी कम रहा है। केवल एक बूथ संख्या 44 पर ही 59.19 प्रतिशत मतदान हुआ। बवाल के कारण सुर्खियों में बने गांव ककरौली के नौ में से चार बूथों पर मतदान प्रतिशत 30 से 40 प्रतिशत के बीच ही रहा, जबकि तीन बूथों पर 50 प्रतिशत से कम वोटिंग हुई। दो बूथ ही ऐसे रहे जहां 50 से 55 फीसदी वोट पड़ पाये। जौली गाव के छह बूथों पर भी कम वोटिंग हुई। यहां पर एक ही बूथ पर 50 प्रतिशत मतदान हो पाया। तिस्सा गांव में भी औसतन वोटिंक का प्रतिशत 50 ही रहा। सिकन्दरपुर में भी वोटिंग का प्रभाव निम्न स्तरीय ही रहा। यहां छह बूथों में से एक पर भी 50 फीसदी मतदान नहीं हुआ। दंगों के कारण पहचान बनाने वाला गांव कवाल भी ज्यादा वोटिंग का जोश नहीं दिखा पाया। यहां पर औसतन 51 प्रतिशत मतदान हुआ है। गांव ढांसरी में वोटरों ने भरपूर जोश दिखाया और यहां 70 फीसदी मतदान हुआ है। इसके साथ ही तेवड़ा, कम्हेडा, खेडी फिरोजाबाद में भी मतदान औसत रहा है। कुल मिलाकर मतदान प्रतिशत कम रहने और कुछ मुस्लिम इलाकों में कम वोटिंग के बाद जीत और हार को लेकर चौपालों पर जो चर्चा गरम है, उसमें भाजपा-रालोद की जीत की संभावना और प्रबल बताई जा रही है, लेकिन हाथी, केतली और पतंग के साथ ही पिछड़े वर्ग और गुर्जर बाहुल्य ग्रामों में भी कम वोटिंग होना एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। छोटे दलों के प्रत्याशियों के बीच होने वाला वोटों का बंटवारा भी इस जीत और हार में बड़ा उलटफेर करने वाला साबित हो सकता है।

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