नई किराया नियमावली पर पालिका के किरायेदार व्यापारियों में बिखराव

मुजफ्फरनगर। पालिका चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप द्वारा पालिका मार्किट के किरायेदार व्यापारियों के करीब तीन दशकों से लंबित प्रकरणों का निस्तारण कराने के लिए कदम आगे बढ़ाया गया। 07 अक्टूबर 2024 को सम्पन्न हुई बोर्ड बैठक में टैक्स विभाग की ओर से प्रस्ताव संख्या 402 के अन्तर्गत नई किराया नियमावली को सदन में प्रस्तुत किया गया, जिसे बोर्ड ने अपनी सहमति प्रदान कर दी थी। इस नई नियमावली में पालिका की संपत्तियों में अवैध किरायेदारों का विनियमितीकरण करने के लिए नामांतरण शुल्क के साथ किराये में 01 सितम्बर 1977 को जारी शासनादेश को आधार बनाते हुए 50 प्रतिशत की वृ(ि करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके बाद आपत्ति मांगी गई। आपत्तियों का निस्तारण करने के लिए चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने समिति का गठन किया गया, जिसमें सभासद राजीव शर्मा, देवेश कौशिक और बबीता वर्मा के साथ ही कर निर्धारण अधिकारी दिनेश यादव को शामिल किया गया है।

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बुधवार को समिति ने आपत्तियों पर दूसरी सुनवाई बैठक की। इसमें किरायेदार व्यापारी पालिका के किराया बढ़ोतरी के प्रस्ताव और दूसरे नियमों को लेकर एकमत नजर नहीं आये। 50 फीसदी किराया वृ(ि का खुला विरोध करने के साथ ही व्यापारियों ने यह भी साफ कर दिया कि वो 1977 के शासनादेश या 2014 के पारित प्रस्ताव के आधार पर किराया वृ(ि को स्वीकार नहीं करेंगे। व्यापारी किरायेदार जयकुमार ने सुनवाई के दौरान कहा कि वो 1974 से पालिका के दुकान आवंटी के रूप में किरायेदार हैं, वो 1977 से किराया निर्धारण नहीं करायेंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि किराया तय करने का आधार वर्तमान को माना जाना चाहिए। इसके साथ ही कई बिन्दुओं पर भी व्यापारियों ने अपनी बात रखी और पालिका की नई नियमावली का मुखर विरोध किया।

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कर निर्धारण अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि व्यापारियों की आपत्तियों पर उनसे तथ्यात्मक मत प्राप्त किया गया, आपत्तियों के समर्थन में उनसे लिखित साक्ष्य या शासनादेश आदि मांगे गये, जो वो प्रस्तुत नहीं कर पाये। सुनवाई के लिए 20 फरवरी का भी दिन तय है, समिति इसके लिए सभागार में उपलब्ध रहेगी। हालांकि व्यापारियों के आग्रह पर आज ही सुनवाई का कार्य पूर्ण किया गया है। इसके बाद 24 फरवरी को समिति की बैठक में आपत्तियों और सुझावों पर चर्चा करते हुए अपनी रिपोर्ट तैयार की जायेगी, जिसे चेयरपर्सन को सौंपा जायेगा। इसके बाद यह रिपोर्ट अनुमोदन के लिए बोर्ड बैठक में प्रस्तुत की जायेगी। सदन की सहमति बनने के लिए इसको स्वीकृति के लिए शासन में भेजा जायेगा। वहां से अनुमति प्राप्त होने पर इसे लागू करने के लिए गजट प्रकाशन कराया जायेगा। समिति की सुनवाई के दौरान प्रवीण जैन चीनू, संजय नारंग, वीरेन्द्र अरोरा, जसप्रीत सिंह, जय कुमार, किरण पाल, भानु प्रताप अरोरा, दीपक कुमार, शिशुकांत गर्ग, विजय तनेजा आदि व्यापारी मौजूद रहे।

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