देवबंद, 19 अप्रैल 2026। देवबंद के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी बाहरा में अक्षय तृतीया पर्व रविवार को श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जैन समाज के लोगों ने इस अवसर पर भगवान आदिनाथ की आराधना करते हुए विशेष धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
जैन दर्शन में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ को राजा श्रेयांस ने इक्षु रस से आहार कराया था। तभी से यह पर्व दान और तप की परंपरा से जुड़ा माना जाता है।

इस पावन अवसर पर णमोकार महामंत्र जैन सभा (रजि.) देवबंद की ओर से मंदिर परिसर में सुबह भक्तामर विधान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान आदिनाथ के अभिषेक और शांतिधारा से हुई। शांतिधारा की बोली श्री अंकित कुमार अविरल जैन ने प्राप्त की।
इसके बाद भक्तामर विधान के मंडल पर पांच कलश स्थापित करने की बोलियां लगीं। यह बोलियां क्रम से श्रीमती सविता जैन, श्रीमती निलीमा जैन, श्रीमती नूतन जैन, श्रीमती ऊषा जैन और श्रीमती जूही जैन ने प्राप्त कीं। वहीं दीपक स्थापना की बोली श्रीमती अर्चना जैन ने ली। इसके बाद नित्य-नियम पूजा और भक्तामर विधान पूजा संपन्न कराई गई।
सभा के संस्थापक अंकित जैन ने बताया कि अक्षय तृतीया जैन धर्म में एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक दिवस है। यह दिन भगवान आदिनाथ के वर्षीतप के पारणे की स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर संयम, साधना और मोक्ष मार्ग के प्रति समर्पण को याद करते हुए विशेष पूजा और विधान आयोजित किए जाते हैं।
सभा के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि भक्तामर स्तोत्र, आचार्य मानतुंग द्वारा रचित स्तुति है, जिसके 48 काव्यों के माध्यम से भगवान आदिनाथ की वंदना की जाती है। उन्होंने कहा कि यह विधान आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और जीवन के क्लेशों को दूर करने की भावना से किया जाता है।
सभा के महामंत्री ऋषभ जैन ने कहा कि जैन धर्म के अनुसार भगवान आदिनाथ को 1 वर्ष, 1 महीना और 13 दिन बाद पहला आहार प्राप्त हुआ था। वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस के हाथों उन्हें इक्षुरस का पारणा कराया गया था। इसी कारण अक्षय तृतीया का पर्व जैन समाज में विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है।
सभा के कोषाध्यक्ष डॉ. पारस जैन ने बताया कि संस्था की ओर से रात्रि में भी श्री जी की आरती, भक्तामर अनुष्ठान और धार्मिक तंबोला का आयोजन किया जाएगा।
इस धार्मिक आयोजन में बाल ब्रह्मचारी अभय भैया जी, अजय जैन, श्रीचंद जैन, अश्वनी जैन, विकास जैन, नीरज जैन, पवित्र जैन, नमन जैन, सरिता जैन, सविता जैन, प्रदीप जैन, अर्चना जैन, उर्मिला जैन और मोना जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।






