लद्दावाला कब्रिस्तान में पेड़ों का अवैध कटान, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश

कब्रिस्तान कमेटी पर संपत्ति के दुरुपयोग और धोखाधड़ी के आरोप, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

मुजफ्फरनगर। शहर के लद्दावाला क्षेत्र स्थित कब्रिस्तान में हरे-भरे पेड़ों के अवैध कटान और संपत्ति के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने कब्रिस्तान की देखरेख करने वाली पूर्व कमेटी पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इस कब्रिस्तान में अधिकार का मामला कई बार विवादों में रहा है। इसमें कमेटी के जिम्मेदार पर कब्रिस्तान की जमीन को बेचने के भी आरोप लगाकर शिकायत की गई थी, जिस पर जांच भी चल रही है, वहीं कुछ लोग इसको लेकर कोर्ट में भी चले गये, कोर्ट ने यथास्थिति बनाने का आदेश जारी किया था, इसके बावजूद भी पेड़ों का कटान और संपत्ति को खुर्दबुर्द किया जा रहा है। इससे तनाव की संभावना भी बनी है।

शहर कोतवाली क्षेत्र के लद्दावाला और रामपुरी मोहल्लों में स्थित कब्रिस्तान की जमीन, जो खसरा नंबर 382/1, 382/3 और 382/4 में दर्ज है, इन दिनों विवाद का केंद्र बनी हुई है। वर्षों से यह कब्रिस्तान मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा अंतिम संस्कार के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है। वर्ष 2012-13 में राज्य सरकार के सहयोग से कब्रिस्तान की चारदीवारी का निर्माण कराया गया था, जो आज भी मौजूद है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कब्रिस्तान की देखरेख की जिम्मेदारी पहले मोहम्मद राशिद अंसारी को सौंपी गई थी। आरोप है कि बीते कुछ वर्षों में उन्होंने कब्रिस्तान से होने वाली आमदनी को देखरेख में लगाने के बजाय निजी उपयोग में खर्च किया। इसके अलावा कब्रिस्तान की ईंटें बेचने, पेड़ों को कटवाने और घास व फलों के ठेके से प्राप्त धन का कोई हिसाब समाज के लोगों को नहीं दिया गया।

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मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब 25 सितंबर 2025 को कथित रूप से कब्रिस्तान की भूमि का वसीयतनामा राशिद द्वारा अपने परिजनों और परिचितों के नाम कर दिया गया। इस कदम के बाद समाज के लोगों ने उन्हें प्रबंधन से हटा दिया और कब्रिस्तान की जिम्मेदारी एक पंजीकृत अंजुमन ट्रस्ट को सौंप दी, जो वर्तमान में देखरेख कर रहा है। आरोप है कि प्रबंधन से हटाए जाने के बाद राशिद और उनके सहयोगी कब्रिस्तान पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं और इसे निजी संपत्ति बताकर शव दफनाने से रोकने की धमकी दे रहे हैं। इससे इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

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लद्दावाला कब्रिस्तान से हरे भरे सामाजिक सम्पत्ति के रूप में खड़े लाखों की कीमत के पेड़ काटने का आरोप इस समिति के लोगों पर है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस कमेटी को फर्जी तरीके से भाई-भतीजावाद के आधार पर मनमानी कर बनाया गया है, इसमें कई लोग आपराधिक छवि के भी शामिल है, जिनके खिलाफ गंभीर मुकदमे भी दर्ज हैं, कुछ तो जेल भी जा चुके हैं।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 20 अप्रैल 2026 को आरोपितों द्वारा प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना करते हुए रात के अंधेरे में लगभग 30 से 40 हरे पेड़ों को काट दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन पेड़ों की कीमत लाखों रुपये में थी और इन्हें अवैध रूप से बेचकर धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। लोगों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही तहसीलदार सदर से मामले की निष्पक्ष जांच कर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की गई है। स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन बढ़ते तनाव को देखते हुए जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। शिकायत करने वालों में मुख्य रूप से डॉ. फुरकान मलिक, शहजाद मलिक, मौ. जुल्फिकार, निसार, शाकिब सैफी, बल्लू खान, मौ. शमशाद, मौ. राशिद, जहूर हसन, मौ. आरिफ, शमशेर, शराफत आदि नागरिक शामिल रहे।

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