एक ही भूमि कई लोगों को बेचने और फर्जी प्लाट दिखाकर रकम हड़पने के आरोप, पीड़ितों की शिकायत पर एसएसपी ने दर्ज कराए मुकदमे
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में जमीन की खरीद-फरोख्त के नाम पर धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा दो मामलों में पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि एक ही भूमि और प्लाट को कई लोगों को बेचकर लाखों रुपये हड़प लिए गए। कहीं कृषि भूमि का बैनामा पहले से कई लोगों के नाम पाया गया, तो कहीं 400 वर्गगज प्लाट दिखाकर करोड़ों के सपने बेच दिए गए। जब पीड़ितों ने अपने पैसे वापस मांगे तो उन्हें टालमटोल, धमकी और अपमान का सामना करना पड़ा। दोनों मामलों में अब पीड़ितों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से कार्रवाई की मांग की है।
मुजफ्फरनगर में जमीन की खरीद-फरोख्त के नाम पर धोखाधड़ी के दो बड़े मामले सामने आए हैं, जिनमें आरोपियों पर एक ही संपत्ति को कई लोगों को बेचकर लाखों रुपये हड़पने का आरोप लगा है। पीड़ितों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पहला मामला थाना चरथावल क्षेत्र के गांव रोनी हरजीपुर का है, जहां सरोज पत्नी राजवीर सिंह ने शिकायत दी कि उन्होंने 9 फरवरी 2026 को ग्राम रोनी हरजीपुर स्थित कृषि भूमि खसरा संख्या 34 का बैनामा वीरेंद्र सिंह निवासी ग्राम टांडा से कराया था। बाद में जानकारी मिली कि यही भूमि पहले ही पंकज, वचन सिंह निवासी ख्वावड़ी तथा जितेंद्र निवासी लाखन, तहसील धौलाना, जिला हापुड़ को बेची जा चुकी थी।
पीड़िता का आरोप है कि आदेश और मनोज नामक दो प्रॉपर्टी दलालों ने बार-बार घर आकर उन्हें और उनके परिवार को गुमराह किया तथा वीरेंद्र सिंह, उसकी पत्नी निर्मला, पुत्र सचिन, अनुज, अंजलि और शालू के साथ मिलकर षड्यंत्रपूर्वक 13 लाख 87 हजार 204 रुपये ठग लिए। आरोप है कि रकम वापस न करनी पड़े, इसके लिए आरोपी ने अपना मकान भी दानपत्र के माध्यम से बेटी कविता के नाम कर दिया। पीड़िता ने आरोपियों पर सुनियोजित धोखाधड़ी कर रकम हड़पने का आरोप लगाया है।
दूसरा मामला थाना छपार क्षेत्र के गांव बरला निवासी सत्यप्रकाश सिंह का है। उन्होंने एसएसपी को दी शिकायत में बताया कि उनके परिचित सईदुज्जमा ने उनकी मुलाकात सलीम अहमद निवासी कुल्हेड़ी, थाना चरथावल से कराई थी। सलीम ने खुद को प्रॉपर्टी डीलर बताते हुए शाहपुर में 400 वर्गगज का प्लाट अपना बताकर बेचने की बात कही। बताया गया कि 10 हजार रुपये प्रति वर्गगज के हिसाब से सौदा तय हुआ और तहसील सदर में 3 लाख रुपये बतौर बयाना दिए गए। इसके बाद सत्यप्रकाश ने अपने और पत्नी के खाते से 10 लाख, 11 लाख रुपये तथा मोहर्रम त्यागी के खाते से 4 लाख रुपये आरोपी के खाते में ट्रांसफर कराए। कुल मिलाकर करीब 28 लाख रुपये आरोपी को दे दिए गए। जब बैनामा कराने की बात आई तो आरोपी टालमटोल करने लगा। शक होने पर तहसील में जांच कराई गई, जिसमें पता चला कि शाहपुर में सलीम के नाम कोई 400 वर्गगज का प्लाट दर्ज ही नहीं है, बल्कि संबंधित संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम रजिस्टर्ड है।
पीड़ित का आरोप है कि पैसे मांगने पर आरोपी लगातार बहाने बनाता रहा। अगस्त 2024 में 2 लाख रुपये लौटाए गए, जबकि 26 लाख रुपये के चेक दिए गए जो बाउंस हो गए। बाद में अम्बा विहार स्थित दूसरे प्लाट का बैनामा कराने का वादा भी किया गया, लेकिन उससे भी मुकर गया। दबाव बढ़ने पर साढ़े चार लाख रुपये लौटाए गए, लेकिन बाकी रकम नहीं दी गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि शेष रकम मांगने पर आरोपी सलीम ने अपने भाई कासिफ, शमीम और नत्थू के साथ मिलकर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।






