मुजफ्फरनगर-वीआईपी नंबर के नाम पर किसान परिवार से की ठगी

वीआईपी मोबाइल नम्बर दिलाने के नाम पर हुआ था सौदा, युवक से डेढ़ लाख रुपये हड़पे

मुजफ्फरनगर। मोबाइल के वीआईपी नंबर का लालच देकर किसान परिवार के युवक से डेढ़ लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। हरिद्वार निवासी युवक ने अपने साथी के साथ मिलकर पहले भरोसा जीता, फिर महंगे वीआईपी नंबर की डील तय कर रकम वसूल ली। बाद में जो सिम भेजा गया, वह कभी एक्टिवेट ही नहीं हुआ। पैसे वापस मांगने पर आरोपी ने रसूख का डर दिखाते हुए जान से मारने की धमकी दी। एसएसपी के आदेश पर शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

शहर कोतवाली क्षेत्र के मौहल्ला प्रेमपुरी निवासी गगन पुत्र चंद्रपाल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर बताया कि वह किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उनकी पहचान तनेजा टेलीकॉम हाउस के संचालक सौरभ तनेजा से पहले से थी। सौरभ ने उन्हें उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार जनपद के भूपतवाला निवासी दक्ष अग्रवाल से मिलवाया, जो वीआईपी मोबाइल नंबर बेचने का काम करता था। शिकायत के अनुसार, करीब डेढ़ साल पहले दक्ष अग्रवाल स्वयं मुलाकात करने के लिए गगन के घर आया था, इससे मेल-जोल बढ़ा तो उनका विश्वास और मजबूत हो गया। शुरुआत में दक्ष ने एक सिम कार्ड भेजा, जिसके बदले गगन ने 10 हजार रुपये नकद दिए। इसके बाद गगन ने एक विशेष वीआईपी नंबर 983000003 लेने की इच्छा जताई। दक्ष अग्रवाल ने ये नम्बर दिलाने का वादा करते हुए गगन को बताया कि शामली निवासी अंकित देशवाल भी इस डील में सहयोग करेगा। अंकित, गगन के मौसेरे भाई नितिन देशवाल जोकि गांव बधेह के प्रधानपति हैं, का परिचित निकला, जिससे गगन का भरोसा और बढ़ गया। इसके बाद वीआईपी नंबर 983000003 की कीमत दो लाख रुपये तय हुई।

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आरोप है कि 8 फरवरी 2025 को गगन के प्रेमपुरी स्थित आवास पर दक्ष अग्रवाल द्वारा भेजा गया एक युवक पहुंचा, जिसने अपना नाम सन्नी बताया। उसने फोन पर दक्ष से बात कराई और वहीं गगन ने राहुल भारद्वाज और वीर सिंह की मौजूदगी में 1.50 लाख रुपये नकद सन्नी को दे दिए। शेष 50 हजार रुपये सिम मिलने के बाद देने की बात तय हुई। गगन के अनुसार कुछ दिन बाद कोरियर के माध्यम से एक सिम कार्ड भेजा गया, लेकिन वह सिम कभी एक्टिवेट नहीं हो सका। कई बार संपर्क करने पर दक्ष अग्रवाल और अंकित देशवाल लगातार जल्द एक्टिवेशन का आश्वासन देते रहे।

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गगन खुद दो बार हरिद्वार जाकर आरोपी से मिलने पहुंचे, लेकिन उसका पता नहीं मिला। जब काफी समय तक सिम चालू नहीं हुआ तो गगन ने अपने 1.50 लाख रुपये वापस मांगे। आरोप है कि इस पर दक्ष अग्रवाल ने खुद को मनी ब्रिक्स का को-फाउंडर बताते हुए बड़े लोगों से संबंध होने की बात कही और धमकी दी कि पुलिस-प्रशासन में उसकी गहरी पकड़ है। उसने गाली-गलौज करते हुए मुकदमे में फंसाने और रास्ते से हटाने तक की धमकी दी। पीड़ित ने बातचीत के स्क्रीनशॉट और अन्य साक्ष्य पुलिस को सौंपे हैं। एसएसपी के आदेश पर शहर कोतवाली पुलिस ने दक्ष अग्रवाल और उसके सहयोगी के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात और धमकी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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