सुविधा शुल्क, अवैध वसूली और सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, सुधार न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय में भ्रष्टाचार, सुविधा शुल्क और अव्यवस्थाओं के आरोपों को लेकर भारतीय किसान यूनियन तोमर ने बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के बाहर सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग पर मरीजों के शोषण का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
धरने को संबोधित करते हुए भाकियू तोमर के प्रदेश प्रभारी ने आरोप लगाया कि जिला चिकित्सालय में भ्रष्टाचार चरम पर है और बिना सुविधा शुल्क दिए मरीजों को उपचार तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे अक्सर बंद रखे जाते हैं, जिसके चलते लगातार वाहनों की चोरी की घटनाएं हो रही हैं। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जिला चिकित्सालय में तैनात कुछ कर्मचारी और संबंधित लोग इन सुविधाओं को लूट का अड्डा बनाकर बैठे हैं। आरोप लगाया कि अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों से 300 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। पैसे देने वालों के लिए नियम-कायदे अलग हो जाते हैं, जबकि गरीब मरीजों को विभिन्न प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं में उलझाकर परेशान किया जाता है। प्रदेश प्रभारी ने यह भी आरोप लगाया कि सीटी स्कैन कराने के नाम पर भी अवैध वसूली की जा रही है। अस्पताल से जुड़े कुछ कर्मचारियों पर मरीजों से मनमानी रकम लेने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के नाम पर तीन हजार रुपये तक की अवैध फीस वसूली जा रही है।
भाकियू तोमर नेताओं ने कहा कि फिलहाल संगठन ने चेतावनी स्वरूप सांकेतिक धरना दिया है, लेकिन यदि भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं पर रोक नहीं लगी तो व्यापक स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग प्रशासन की होगी। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को ही भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया ने जिला चिकित्सालय का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और अन्य चिकित्सकों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे। साथ ही चेतावनी भी दी थी कि यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





